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नोएडा में डॉग बाइट के बढ़ते मामले, हर महीने आठ हजार से अधिक लोगों पर हमलावर लावारिस कुत्ते

Dog Bite in Noida : दिल्ली-एनसीआर में लावारिस कुत्तों का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हर गली, नुक्कड़ और चौराहे पर आसानी से दिखने वाले ये कुत्ते अब लोगों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थिति इतनी चिंताजनक है कि हर महीने आठ हजार से अधिक लोग इनके हमले का शिकार हो रहे हैं। इनमें से लगभग छह हजार लोग सरकारी अस्पतालों में और करीब दो हजार निजी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस हिसाब से सालभर में करीब एक लाख लोग डॉग बाइट से प्रभावित हो रहे हैं।

20 हजार वैक्सीन डोज लगाए

पिछले दो महीनों की बात करें तो लगभग 16 हजार लोग लावारिस कुत्तों के हमले का शिकार हुए हैं। इनमें से 12 हजार लोगों ने सरकारी चिकित्सकीय संस्थानों में और चार हजार ने निजी अस्पतालों में एआरवी की खुराक ली है। उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. टीकम सिंह के अनुसार, सरकारी संस्थानों में हर महीने औसतन आठ से दस हजार एआरवी की खुराक दी जाती है। मई और जून में जिला अस्पताल समेत अन्य सरकारी केंद्रों पर करीब 20 हजार वैक्सीन डोज लगाई गईं, जिनमें 12 हजार को पहली खुराक और बाकी को दूसरी, तीसरी और चौथी खुराक दी गई।

आवारा और पालतू जानवरों के हमलों का खतरा

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कुत्तों के काटने के साथ-साथ बंदर, बिल्ली और अन्य जानवरों के काटने के मामलों में भी एआरवी की खुराक दी जा रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि शहर में आवारा और पालतू जानवरों के हमलों का खतरा बढ़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले में डॉग बाइट हॉट स्पॉट की संख्या भी बढ़ा दी गई है। पिछले साल तक जहां 20 हॉट स्पॉट थे, वहीं इस साल यह संख्या बढ़कर 34 हो गई है। नए चिह्नित हॉट स्पॉट में सेक्टर-110, नगला चरणदास, दुजाना, अच्छेजा, छपरौला, कुलेसरा, ओमीक्रोन, डाढ़ा, कासना, फतेहपुर, जलपुरा, खेरली, पलवारी और जेवर नगर शामिल हैं। इन इलाकों में पालतू और आवारा दोनों तरह के कुत्तों द्वारा काटने की घटनाएं अधिक सामने आ रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्या बदलेंगे हालात

सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश में आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर शेल्टर होम में रखने की बात कही गई है। इस फैसले के बाद डॉग लवर्स में नाराजगी है और दिल्ली में इसके विरोध में प्रदर्शन भी हो चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बढ़ते डॉग बाइट मामलों पर नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने जरूरी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि शहरी प्रबंधन और पशु कल्याण दोनों से जुड़ा गंभीर मामला है। समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए न केवल शेल्टर होम की व्यवस्था, बल्कि आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी और निगरानी पर भी जोर देना होगा।

घरों से निकलने से डर रहे लोग

बढ़ती घटनाओं को देखते हुए इस समय नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई परिवार डॉग बाइट के डर में जी रहे हैं। गाजियाबाद के आंकड़ों की बात करें तो यहां हर तीन मिनट में एक को कुत्ते ने काटा है। बच्चे, बुजुर्ग और काम पर जाने वाले लोग खासतौर पर संवेदनशील हैं। सवाल यही है कि प्रशासन और नोएडा प्राधिकरण इस बढ़ते संकट को कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी तरीके से काबू में ला पाते हैं।

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