Cough Syrup Scandal: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कोडिन युक्त कफ सिरप के काले कारोबार का जाल लगातार गहराता जा रहा है। ताज़ा कार्रवाई में 12 और फर्मों के खिलाफ कोतवाली थाने में FIR दर्ज की गई है। इससे पहले वाराणसी की 28, जौनपुर की 12, कानपुर की 8, और लखनऊ की 3 फर्मों पर केस दर्ज था। अब कुल 36 फार्म इस कथित 100 करोड़ के कफ सिरप घोटाले के घेरे में आ चुकी हैं।
पूरे रैकेट के मास्टरमाइंड का नाम आया सामने
जांच से सामने आया है कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल था, जिसने बनारस से लेकर रांची और वहां से बांग्लादेश तक कागज़ों पर ही कफ सिरप की खरीद-बिक्री का जाल बुन रखा था। रांची की शैली ट्रेडर्स के नाम पर वाराणसी व पूर्वांचल के थोक व्यापारी दिखते थे, लेकिन असली माल कभी दुकानों तक पहुंचा ही नहीं। हर फर्म को सिर्फ काग़ज़ी बिलिंग दिखाने के बदले प्रति बोतल 10 रुपये दिए जाते थे। हजारों-लाखों बोतलों का यह ‘फर्जी बिक्री तंत्र’ अंतरराष्ट्रीय बाजार में असली तस्करी छिपाने का तरीका था, जहां इसी सिरप को कई गुना कीमत पर बेचा जाता था।
अवैध कारोबार का घना जाल
सूत्रों का दावा है कि इस अवैध कारोबार में सफेदपोश लोग, केमिस्ट एसोसिएशन के बड़े पदाधिकारी और कुछ सरकारी अफसर तक शामिल थे। हर बोतल पर सभी का हिस्सा पहले से तय था, यही वजह थी कि महीनों तक यह धोखाधड़ी का काम बिना रोक चलता रहा। इसी बीच, शुभम जायसवाल के बेहद करीबी अमित सिंह टाटा को यूपी STF ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके फर्म पर भी कफ सिरप की संदिग्ध खरीद-बिक्री के सबूत मिले हैं। माना जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद कई बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं।
फिलहाल वाराणसी में SIT जांच कर रही है, जबकि अन्य जिलों में भी कई टीमें सक्रिय हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस 100 करोड़ के कफ सिरप तंत्र में किसका कितना हिस्सा था और असली सरगना कितने दूर तक जुड़े हुए हैं।

