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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खत्म किया धरना, कहा- दुखी मन से बिना स्नान लौट रहा हूं

Shankaracharya Avimukteshwaranand Saraswati: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज माघ मेले में 11 दिनों से जारी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना बुधवार को खत्म कर दिया और काशी के लिए रवाना हो गए। इससे पहले अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि , ”बहुत दुखी मन से अपने 39 साल के आध्यात्मिक सफर में पहली बार माघ मेला बीच में ही छोड़कर जा रहा हूं। मन बहुत दुखी है। हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं।’

अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज को बताया शांति की भूमि

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रयागराज हमेशा से धर्म अध्यात्म और शांति की भूमि रही है। यहां बहुत ही श्रद्धा के साथ पिछले 39 सालों से आता रहा हूं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि स्नान करने से रोक दिया जाए। मेरे साथ और मेरे अनुयायियों के साथ जो घटना हुई वह आत्मा को झकझोर देने वाली थी। इससे न्याय और मानवता के प्रति मेरा विश्वास कमजोर हुआ है। मुझे जो कहना था, कह चुका हूं, लेकिन एक बात और बता दूं कि कल मुझे मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और भेजा गया। इसमें कहा गया है कि मुझे ससम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जब दिल दुखी हो और मन में गुस्सा हो तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पता है”।

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प्रशासन के प्रस्ताव में क्षमा के शब्द नहीं थे

शंकराचार्य ने कहा कि प्रस्ताव में क्षमा के कोई शब्द नहीं थे, जबकि उनके अनुसार मूल मुद्दा यही है कि संतों, सन्यासियों और बटुकों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार हुआ, उसके लिए प्रशासन को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए। अगर आप अपनी गलती के लिए क्षमा याचना कर सकते हैं, तब तो ठीक, नहीं तो कोई अन्य प्रस्ताव मंजूर नहीं।

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