Ram Mandir Dhwajarohan: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आज ऐसा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पल साकार होने जा रहा है, जिसके साक्षी बनने के लिए देश-दुनिया की निगाहें रामनगरी पर टिकी हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब मंदिर के शिखर पर विजयी धर्म-ध्वज फहराए जाने का महाआयोजन अपने शिखर पर है। इस दिव्य क्षण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उपस्थित रहेंगे और अभिजीत मुहूर्त में विशेष रूप से तैयार की गई केसरिया ध्वजा को शिखर पर आरोहित करेंगे।
1000 क्विंटल फूलों से सजा शहर
पूरे अयोध्या में आज उत्सव का ऐसा माहौल है, जैसा किसी दिव्य पर्व पर भी कम ही देखने को मिलता है। शहर को करीब 1000 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। सड़कें, घाट, मंदिर और गलियां हर ओर रंग-बिरंगी पुष्प वर्षा जैसा दृश्य मन मोह रहा है। वहीं, 20 नवंबर से जारी वैदिक अनुष्ठानों में देश-भर से आए 108 आचार्य शामिल हैं, जो आज के ध्वजारोहण को आध्यात्मिक रूप से सिद्ध करने में लगे हैं। इस बीच अयोध्या से नेपाल के जनकपुर धाम तक सियाराम विवाह का उत्सव भी पूरे उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
भव्य और अनोखा ध्वज
आज फहराया जाने वाला भगवा ध्वज अपने आप में भव्य और अनोखा है। इसे पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली के अनुरूप तैयार किया गया है। लगभग 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा यह ध्वज भगवान राम की वीरता और विजय का प्रतीक है। इसमें चमकता हुआ सूरज, “ॐ” का पवित्र चिन्ह और कोविदार वृक्ष का प्रतीक अंकित है। यह ध्वज मंदिर की 161 फीट ऊंची चोटी और 42 फीट ऊंचे ध्वजदंड के अनुपात में विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है, मंदिर निर्माण कार्य की पूर्णता का संदेश देना।

प्रधानमंत्री मोदी का भव्य रोड शो
इस ऐतिहासिक क्षण से पहले प्रधानमंत्री मोदी का भव्य रोड शो भी आयोजित किया जा रहा है। वह सप्तमंदिर परिसर पहुंचे, जहां महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, वाल्मीकि, देवी अहिल्या, निषादराज गुहा और माता शबरी से जुड़े मंदिर स्थित हैं। इसके बाद उन्होंने श्री राम जन्मभूमि परिसर के शेषावतार मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।
2 किलो वजनी केसरिया ध्वजा
अभिजीत मुहूर्त में जैसे ही पीएम मोदी पवित्र बटन दबाएंगे, 2 किलो वजनी केसरिया ध्वजा शिखर पर लहराने लगेगी। इसी के साथ राम मंदिर को विधिवत “पूर्ण” माना जाएगा और यह क्षण इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो जाएगा। अयोध्या आज एक बार फिर साबित कर रही है- धर्म, आस्था और संस्कृति का केंद्र वही है, जहां मर्यादा पुरुषोत्तम राम का स्मरण होता है।
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