Sambhal violence investigation report : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले साल 24 नवंबर 2024 को हुई सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए गठित विशेष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. करीब 450 पन्नों की इस रिपोर्ट में न केवल उस दिन हुई हिंसा की घटनाओं का ब्योरा दिया गया है, बल्कि संभल के ऐतिहासिक सांप्रदायिक तनाव, जनसांख्यिकीय बदलाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है. तीन सदस्यीय इस जांच समिति की अध्यक्षता इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश देवेंद्र अरोड़ा ने की. समिति में रिटायर्ड आईपीएस अफसर एके जैन और अमित प्रसाद सदस्य के तौर पर शामिल थे.
दंगों और आतंकी लिंक पर गंभीर खुलासा
रिपोर्ट के मुताबिक आजादी के समय (1947) संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी करीब 45% थी, जबकि मुस्लिम आबादी 55% थी. लेकिन अब हिंदू आबादी घटकर 15-20% के बीच रह गई है. रिपोर्ट में बार-बार हुए दंगों और तुष्टिकरण की राजनीति को इस बदलाव के प्रमुख कारणों में गिना गया है. संभल में आजादी के बाद से अब तक 15 बड़े सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं. इनमें 1947, 1948, 1953, 1958, 1962, 1976, 1978, 1980, 1990, 1992, 1995, 2001 और 2019 जैसे वर्ष शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि बार-बार की हिंसा के चलते हिंदू समुदाय का जिले से पलायन होता गया.
आतंकी संगठनों से संबंध
रिपोर्ट में बताया गया है कि संभल लंबे समय से आतंकी संगठनों का गुप्त अड्डा रहा है. अलकायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे संगठनों की सक्रियता का जिक्र करते हुए समिति ने कहा है कि अमेरिका द्वारा घोषित आतंकवादी मौलाना आसिम उर्फ सना उल हक का भी संभल से सीधा कनेक्शन था. जिला अवैध हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए भी कुख्यात रहा है. हाल के वर्षों में इन पर कार्रवाई हुई है और प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को नियंत्रण में लाया गया है.
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क्या होगा सरकार का अगला कदम?
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में सुझाए गए कदमों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है. अब यह देखना अहम होगा कि शासन इस रिपोर्ट के आधार पर क्या निर्णय लेता है, क्या कोई प्रशासनिक फेरबदल होगा, क्या संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ेगी, या फिर डेमोग्राफिक असंतुलन और सांप्रदायिक सौहार्द को लेकर कोई ठोस नीति बनेगी.

