Bihar Election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल गरम है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा सुर्खियाँ विपक्षी महागठबंधन की अंदरूनी जंग बटोर रही हैं। सीट बंटवारे को लेकर असहमति और खींचतान अब खुलकर सामने आ चुकी है। प्रदेश की 11 विधानसभा सीटों पर महागठबंधन के घटक दल RJD, कांग्रेस, CPI और VIP एक-दूसरे के आमने-सामने हैं यानी गठबंधन के भीतर ही ‘दोस्ताना’ मुकाबला!
छह सीटों पर RJD बनाम कांग्रेस
सबसे बड़ा टकराव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच देखने को मिल रहा है। दोनों दल छह सीटों पर सीधे चुनावी मैदान में भिड़े हैं।
- वैशाली: RJD से अजय कुशवाहा बनाम कांग्रेस के संजीव कुमार
- सिकंदरा: RJD के उदय नारायण चौधरी बनाम कांग्रेस के विनोद चौधरी
- कहलगांव: RJD के रजनीश आनंद बनाम कांग्रेस के प्रवीण कुशवाहा
- सुल्तानगंज: RJD के चंदन सिन्हा बनाम कांग्रेस के ललन यादव
- रकटियागंज: RJD के दीपक यादव बनाम कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडे
- वारसलीगंज: RJD की अनीता देवी बनाम कांग्रेस के मंटन सिंह
इन सीटों पर मतदाताओं में असमंजस की स्थिति है, क्योंकि दोनों उम्मीदवार गठबंधन के दावेदार हैं, लेकिन एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं।
चार सीटों पर CPI और कांग्रेस आमने-सामने
वामदल CPIऔर कांग्रेस के बीच भी चार सीटों पर सीधा मुकाबला है-
- बछवारा: CPI के अवधेश राय बनाम कांग्रेस के शिव प्रकाश गरीबदास
- राजापाकर: CPI के मोहित पासवान बनाम कांग्रेस की प्रतिमा दास
- बिहार शरीफ: CPI के शिव कुमार यादव बनाम कांग्रेस के उमेर खान
- करगहर: CPI के महेंद्र गुप्ता बनाम कांग्रेस के संतोष मिश्रा
इन मुकाबलों ने महागठबंधन की सीटों पर समीकरण उलझा दिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन टकरावों का सीधा फायदा NDA को मिल सकता है।
एक सीट पर VIP बनाम RJD
इसके अलावा, चैनपुर सीट पर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और RJD आमने-सामने हैं। VIP से बाल गोविंद बिंद और RJD से बृजकिशोर बिना के बीच कांटे की टक्कर है।
चुनावी तारीखें और आंकड़े
बिहार में दो चरणों में मतदान होने है 6 और 11 नवंबर को, जबकि नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। पहले चरण में 121 और दूसरे में 122 सीटों पर वोटिंग होगी। राज्य में 7.43 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 3.92 करोड़ पुरुष, 3.50 करोड़ महिलाएं और 1,725 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।
कुल 243 सीटों में से 38 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। अब सवाल यह है, क्या महागठबंधन इन “दोस्ताना” जंगों से पार पा सकेगा, या फिर यह आंतरिक फूट सत्ता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित होगी?
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