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मरु ज्वाला का शौर्य: जैसलमेर की सरहद पर भारत की ताकत का ऐतिहासिक प्रदर्शन, 30 हजार जवानों ने दिखाई शक्ति

Rajasthan News: राजस्थान के सरहदी ज़िले जैसलमेर में मंगलवार को भारतीय सेना ने अपने अद्भुत शौर्य और पराक्रम का ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरा मरुस्थल ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। भारत-पाक सीमा के करीब सेना ने “ऑपरेशन मरु ज्वाला” के तहत एक जबरदस्त युद्धाभ्यास किया, जिसमें थलसेना, वायुसेना और नौसेना, तीनों सेनाओं के जवानों ने हिस्सा लिया।

युद्धाभ्यास में 30 हजार से अधिक जवान

दोपहर में करीब दो घंटे तक चले इस भव्य युद्धाभ्यास में आसमान से हेलीकॉप्टर गरजे, जमीन पर टैंक दौड़े, और हवा में ड्रोन ने दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाते हुए अपनी तकनीकी ताकत का प्रदर्शन किया। जैसलमेर की तपती रेत में जब सेना के टैंक एक साथ आगे बढ़े तो पूरा इलाका थर्राने लगा। सेना के इस अभ्यास का उद्देश्य था- सीमावर्ती क्षेत्रों में संभावित आपात स्थिति में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित करना।

सेना के सूत्रों के मुताबिक, “ऑपरेशन त्रिशूल” नामक इस संयुक्त युद्धाभ्यास में करीब 30 हजार से अधिक जवान शामिल हुए हैं। 30 अक्टूबर को इस विशाल अभ्यास की शुरुआत हुई थी, जो अब अपने निर्णायक चरण में है। ‘मरु ज्वाला’ इसका सबसे प्रमुख चरण है, जिसमें आधुनिक हथियारों, मिसाइल सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर, एंटी-टैंक गाइडेड सिस्टम और एयर डिफेंस तकनीक का प्रदर्शन किया गया।

जवानों का उत्साहवर्धन

सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और जवानों का उत्साहवर्धन किया। दोपहर के प्रथम चरण के समापन के बाद उन्होंने सैनिकों से मुलाकात की और उनके पराक्रम की सराहना की। जैसे ही अभ्यास समाप्त हुआ, पूरा इलाका “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से गूंज उठा। आज यानी 12 नवंबर को इस अभ्यास का दूसरा चरण “अखंड प्रहार” के नाम से आयोजित किया जाएगा, जिसमें तीनों सेनाएं एक साथ संयुक्त आक्रमण रणनीति का प्रदर्शन करेंगी।

मरुस्थल की रेत पर हुआ यह युद्धाभ्यास भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता, तकनीकी मजबूती और युद्ध तत्परता का प्रतीक है। जिसने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि भारत की सरहदें सुरक्षित हैं और हर चुनौती का जवाब देने के लिए भारतीय सेना हर वक्त तैयार है।


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