Rajasthan News: जयपुर में 10 साल के समर मीणा की मौत को दो साल बीत जाने के बाद उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि बिना उनकी अनुमति उसके आंखें निकाल ली गईं। हालांकि पुलिस जांच में पता चला कि नेत्रदान के लिए परिवार ने सहमति दी थी। अब पुलिस इस बात की जांच करेगी कि क्या यह सहमति सही थी या इस मामले में कोई बड़ी अनियमितता हुई है।
हादसे का विवरण: सिर पर गिरा लोहे का भारी टुकड़ा, मासूम की मौत
करौली जिले के टोडाभीम इलाके का रहने वाला 10 वर्षीय समर मीणा अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। अचानक ऊपर से एक भारी लोहे की चादर उसके सिर पर गिर गई। गंभीर चोट लगने के बाद परिवार ने उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां से डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया। लेकिन जयपुर जाते हुए रास्ते में ही समर की मौत हो गई।
परिवार का आरोप और पुलिस जांच
समर के पिता, किरोड़ीलाल मीणा, अपने बेटे का शव लेकर गांव लौट रहे थे, तभी गांव के एक परिचित मदनमोहन ने फोन कर बताया कि बच्चा शायद अभी भी जीवित है और जयपुर के डॉक्टर उसे बचा सकते हैं। इस बीच, दो साल बाद परिवार ने जयपुर के एसएमएस थाने में यह शिकायत दर्ज कराई कि उनकी अनुमति के बिना समर की आंखें निकाल ली गईं। पुलिस ने जांच शुरू की और पाया कि नेत्रदान के लिए परिवार की सहमति थी, लेकिन अब वे जांच करेंगे कि क्या यह सहमति वास्तव में वैध थी या किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है।

