होम = State = राजस्थान = सोनम वांगचुक केस में नया मोड़: हिरासत आदेश सौंपा गया, कोर्ट में जाएगी पत्नी गीतांजलि

सोनम वांगचुक केस में नया मोड़: हिरासत आदेश सौंपा गया, कोर्ट में जाएगी पत्नी गीतांजलि

Rajasthan News : लद्दाख के जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के 11 दिन बाद आखिरकार उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो को उनसे मिलने की अनुमति मिल गई। मंगलवार देर रात जोधपुर सेंट्रल जेल में यह मुलाकात हुई, जिसके बाद गीतांजलि ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए बड़ा बयान दिया।

NSA के तहतआरोपों और कार्रवाई का पूरा विवरण

गीतांजलि अंगमो ने बताया कि उन्हें आखिरकार वांगचुक की गिरफ्तारी से जुड़ा हिरासत आदेश (Detention Order) सौंपा गया है। इस आदेश में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत लगाए गए आरोपों और कार्रवाई का पूरा विवरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। गीतांजलि ने कहा “हम कानूनी रूप से इस अन्यायपूर्ण गिरफ्तारी का मुकाबला करेंगे।”

“हौसला अब भी अटूट, विश्वास अडिग”

मुलाकात के बाद गीतांजलि ने बताया कि जेल में भी वांगचुक का मनोबल बेहद मजबूत है। गीतांजलि ने ट्वीट में लिखा आज उनसे मिलने का अवसर मिला। वे पूरी दृढ़ता और साहस के साथ खड़े हैं। उनकी आत्मा अब भी उतनी ही निडर है जितनी पहले थी।

गीतांजलि के मुताबिक, NSA जैसे कठोर कानून के तहत गिरफ्तारी के बावजूद वांगचुक का उत्साह और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण जरा भी कम नहीं हुआ है।

क्या है मामला?

बता दें कि सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया है। यह अधिनियम सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी व्यक्ति को एक वर्ष तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है।

वांगचुक पिछले कई महीनों से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) के तहत विशेष दर्जा देने और वहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की मांग कर रहे थे। इसी मुद्दे पर उन्होंने शांतिपूर्ण अनशन भी किया था। अनशन के कुछ ही दिनों बाद उन्हें गिरफ्तार कर जोधपुर भेजा गया।

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समर्थन में उठी आवाजें

वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद देशभर के कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों और राजनीतिक संगठनों ने सरकार की इस कार्रवाई को असंवेदनशील बताया है। लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर किसी नागरिक को NSA जैसे कानून के तहत कैद करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

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