Rajasthan POCSO Court: रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक सनसनीखेज मामले में राजस्थान के जोधपुर से ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने इंसानियत और न्याय की मिसाल कायम कर दी। यहां एक मां ने अपने ही बेटे के खिलाफ जाकर अपनी बहुओं को इंसाफ दिलाया। अदालत ने आरोपी को गंभीर अपराधों का दोषी मानते हुए 10 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई है।
पांच साल पुराना मामला
यह मामला साल 2021 का है, जब पीपाड़ थाना क्षेत्र के एक गांव में परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि आरोपी युवक ने घर की छोटी बहू के साथ दुराचार की कोशिश की। घटना के दौरान महिला के शोर मचाने पर उसकी सास मौके पर पहुंची, जिससे आरोपी वहां से भाग निकला।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी अपनी बड़ी बहू के साथ गलत हरकत कर चुका था। उस समय सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से मामला सामने नहीं आया, लेकिन दूसरी घटना के बाद परिवार ने चुप्पी तोड़ने का फैसला किया।
मां की गवाही बनी केस का टर्निंग पॉइंट
इस केस की सबसे अहम कड़ी खुद आरोपी की मां रही। उसने न सिर्फ बहुओं का साथ दिया, बल्कि पुलिस में बयान दर्ज कराने से लेकर अदालत में गवाही देने तक अपने फैसले पर अडिग रही। मां ने अपने बेटे को आदतन अपराधी बताते हुए कोर्ट से कड़ी सजा की मांग की। उसकी स्पष्ट और मजबूत गवाही ने पूरे मामले को निर्णायक दिशा दी।
अदालत का सख्त रुख
पॉक्सो विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे 10 साल की कठोर कैद के साथ 85 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
फैसले में गूंजा रामचरितमानस का संदेश
इस मामले में अदालत का फैसला भी चर्चा का विषय बन गया। न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने अपने आदेश में रामचरितमानस की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में महिलाओं की गरिमा की रक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने लिखा कि छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्रवधू और बेटी इन सभी को समान सम्मान मिलना चाहिए और इन पर गलत नजर डालना गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर दंड जरूरी है।
इंसानियत की मिसाल बनी मां
यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं, बल्कि उस साहस की मिसाल है जहां एक मां ने रिश्तों से ऊपर उठकर न्याय को चुना। उसने यह साबित कर दिया कि सच्चाई और इंसाफ के सामने कोई रिश्ता बड़ा नहीं होता।
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