Gyanodaya Conclave : न्यूज़ इंडिया 24×7 द्वारा आयोजित ‘ज्ञानोदय’ कॉन्क्लेव में राजस्थान के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद को केवल परंपरा के रूप में नहीं बल्कि यह एक ‘समग्र विज्ञान’ के रूप में देखना चाहिए। यह एक अद्भुत ज्ञान है। उन्होंने कहा कि अगर 150 वर्ष पहले देखें तो आयुर्वेद के माध्यम से ही इलाज होता था। यह एक अद्भुत ज्ञान है जो प्रत्येक व्यक्ति को जानना और समझना चाहिए। आयुर्वेद कोविड के समय में या यूँ कहें तो 10 से 12 वर्षों के अंदर आयुर्वेद को सरकारों के द्वारा बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने ये भी कहा कि आम लोग आयुर्वेद को अपनाकर स्वस्थ हो रहें हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रांताओं और अंग्रेजी शासन के प्रभाव के कारण आयुर्वेद की प्रसिद्धि कम हुई, जबकि अन्य पद्धतियां बढ़ीं। इसके अलावा, निश्चित रूप से एलोपैथिक पद्धति या आधुनिक पश्चिमी चिकित्सा पद्धति का विकास हुआ और इसने काफी प्रगति भी की। हालांकि, आयुर्वेद की शिक्षा निरंतर चलती रही। आजादी के बाद भी, इसका प्रचार-प्रसार उतने व्यापक स्तर पर नहीं हो पाया, जितना होना चाहिए था।
राजस्थान में न्यूज़ इंडिया का 'ज्ञानोदय' कॉन्क्लेव
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा का बड़ा बयान, कहा-
"आयुर्वेद को केवल परंपरा नहीं, एक 'समग्र विज्ञान' के रूप में देखना चाहिए"#GyanodayaConclave2025 @Shalendervoice l @AChaturvediUp pic.twitter.com/5LZJ8grLf1
— News India 24×7 (@newsindia24x7_) October 7, 2025
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