होम = State = राजस्थान = अलवर में ‘क्लोरीन कोड-रेड’: फैक्ट्री में गैस रिसाव का अलार्म बजते ही दौड़ी एजेंसियां, मिनट-दर-मिनट ऐसे हुआ बड़े ऑपरेशन का अभ्यास

अलवर में ‘क्लोरीन कोड-रेड’: फैक्ट्री में गैस रिसाव का अलार्म बजते ही दौड़ी एजेंसियां, मिनट-दर-मिनट ऐसे हुआ बड़े ऑपरेशन का अभ्यास

Rajasthan News: राजस्थान में अलवर के एम.आई.ए. औद्योगिक क्षेत्र में बुधवार सुबह अचानक सायरन बज उठा सूचना थी कि लॉर्ड क्लोरो-एल्कलीज फैक्ट्री से क्लोरीन गैस के रिसाव की आशंका है। लेकिन यह कोई वास्तविक आपदा नहीं, बल्कि जिला प्रशासन, पुलिस और NDRF द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित हाई-इंटेंसिटी मॉक ड्रिल थी, जिसका उद्देश्य था, किसी संभावित रासायनिक हादसे की स्थिति में सरकारी मशीनरी की तैयारियों का सटीक आकलन।

पूरे इलाके में एलर्ट

ADM सिटी बीना महावर ने बताया कि यह ड्रिल सिर्फ एक अभ्यास नहीं बल्कि एजेंसियों के बीच समन्वय, कम्युनिकेशन और त्वरित प्रतिक्रिया की वास्तविक समय परखी जाने वाली परीक्षा थी। इसके लिए फैक्ट्री परिसर में गैस लीक की काल्पनिक परिस्थिति तैयार की गई। जैसे ही रिसाव का संकेत मिला, पूरे इलाके में एलर्ट जारी कर दिया गया। पलभर में फायर ब्रिगेड यूनिट, NDRF की स्पेशल टीम, जिला प्रशासन की आपदा प्रबंधन स्क्वाड और मेडिकल रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट मौके पर पहुंच गईं। कर्मचारियों को सुरक्षा मानकों के अनुसार निकाला गया, फैक्ट्री परिसर को सील किया गया और रिसाव बिंदु तक केवल तकनीकी दल को प्रवेश दिया गया।

ट्रैफिक डायवर्जन किया लागू

एडिशनल SP शरण कांबले ने बताया कि पुलिस ने तुरंत ऑपरेशन संभालते हुए क्षेत्र में कॉर्डन जोन स्थापित किया, जिससे रेस्क्यू टीमों का मूवमेंट सुचारू रहे। साथ ही ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया ताकि किसी भी तरह की पैनिक स्थिति पैदा न हो। उन्होंने कहा कि ऐसे अभ्यास पुलिस की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को तेज और संगठित बनाते हैं।

सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए प्रेरित

NDRF की टीम ने अपने हाई-टेक गैजेट्स के साथ रिस्क असेसमेंट, गैस डिटेक्शन और कंटेनमेंट प्रोसेस का लाइव प्रदर्शन किया। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी लगातार मॉनिटरिंग करते रहे और पूरे ऑपरेशन के दौरान प्रत्येक एजेंसी की दक्षता का मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह मॉक ड्रिल बिना किसी बाधा और नुकसान के सफलतापूर्वक संपन्न हुई। ऐसे अभ्यास औद्योगिक इकाइयों को भी सुरक्षा मानकों में सुधार के लिए प्रेरित करते हैं और शहर की समग्र आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत बनाते हैं।

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