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मुंबई मेयर की कुर्सी पर ‘छह का खेल’, संजय राउत का दावा, ओवैसी फैक्टर और महायुति में भूचाल!

BMC Mayor News: देश की सबसे अमीर नगर पालिका बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सत्ता को लेकर सियासी जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मेयर की कुर्सी के लिए चल रही यह लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, बल्कि रणनीति, विश्वासघात और सत्ता के असली नियंत्रण की है। इसी बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसने महायुति खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है। राउत ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे गुट महज 6 सीट दूर है मेयर बनाने से। उनका यह बयान आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई क्योंकि बहुमत का आंकड़ा 114 है और विपक्ष के पास अभी सिर्फ 108 का दावा किया जा रहा है।

क्या पर्दे के पीछे ओवैसी की एंट्री?

संजय राउत के 108 के आंकड़े ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उद्धव गुट के पास 65 सीटें हैं, कांग्रेस के पास 24, NCP (शरद पवार गुट) और अन्य छोटे दल मिलाकर भी गणित पूरा नहीं बैठता। ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या यह कमी AIMIM के सहारे पूरी की जाएगी? अगर ऐसा होता है, तो यह BJP को सत्ता से दूर रखने के लिए विपक्ष का सबसे बड़ा और जोखिम भरा दांव होगा जहां मुस्लिम बहुल वार्ड निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

राउत का शिंदे पर हमला

संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि शिंदे गुट अपने ही पार्षदों से डरा हुआ है। राउत के अनुसार, शिंदे सेना के पार्षदों को बांद्रा और कल्याण-डोंबिवली के तीन अलग-अलग होटलों में रखा गया है ताकि वे पाला न बदल सकें। राउत ने तंज कसते हुए कहा, “जो लोग कल ED के डर से पार्टी छोड़ गए थे, आज उन्हें अपने ही पार्षदों पर भरोसा नहीं है। हमारे पार्षद खुले घूम रहे हैं, हमें किसी का डर नहीं।”

मेयर या तिजोरी की चाबी?

भले ही महायुति (बीजेपी–शिंदे–अजित पवार) संख्या बल में सबसे आगे दिख रही हो, लेकिन अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ चुकी है। BJP अपने 89 पार्षदों के दम पर किसी भी हाल में मेयर की कुर्सी अपने पास रखना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने साफ कर दिया है कि 30 जनवरी को BMC का मेयर BJP का ही होगा, ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर भी वह राजी नहीं। वहीं, शिंदे गुट अपने 29 पार्षदों के बल पर या तो ढाई साल का मेयर पद चाहता है या फिर उससे भी ताकतवर पद स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन।

क्यों सबसे ताकतवर है स्टैंडिंग कमेटी?

मुंबई महानगरपालिका में असली ताकत मेयर के पास नहीं, बल्कि स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष के हाथ में होती है। 50 लाख रुपये से ऊपर का कोई भी टेंडर या विकास प्रोजेक्ट इस कमेटी की मंजूरी के बिना पास नहीं हो सकता। सड़कें, पानी, सीवर, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट हर फाइल इसी टेबल से गुजरती है।
यही वजह है कि इसे BMC की ‘तिजोरी की चाबी’ कहा जाता है। और यही कारण है कि BJP यह ताकत शिंदे के हाथ देने के मूड में नहीं दिख रही।

कांग्रेस और मनसे भी बन सकती हैं गेमचेंजर

अगर महायुति में बात बिगड़ती है, तो राजनीति फिर से नया मोड़ ले सकती है। सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी पुराने सहयोगी उद्धव ठाकरे के साथ समझौता करेगी? दोनों साथ आए तो आंकड़ा 154 पहुंच जाएगा, लेकिन क्या उद्धव बिना मेयर पद के मानेंगे? कांग्रेस किसी भी कीमत पर बीजेपी का मेयर नहीं चाहती, इसलिए वह उद्धव या शिंदे जो भी BJP के खिलाफ खड़ा होगा उसके साथ जाने को तैयार हो सकती है। वहीं, राज ठाकरे की मनसे (6 सीटें) फिलहाल उद्धव के साथ है, लेकिन मुंबई की राजनीति में पलटवार देर नहीं लगाता।

रणनीति या मनोवैज्ञानिक दबाव?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या संजय राउत का 108 वाला दावा सिर्फ एक सियासी दबाव बनाने की चाल है, या वाकई पर्दे के पीछे ऐसा गठजोड़ तैयार हो चुका है जो मुंबई की सत्ता का नक्शा बदल देगा? मुंबई मेयर का चुनाव अब सिर्फ नंबर गेम नहीं, बल्कि विचारधाराओं, अस्तित्व और नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है। खेल शुरू हो चुका है… और आखिरी चाल अभी बाकी है।

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