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BJP की कठपुतली बना आयोग… MP में मतदाता सूची पर मचा सियासी घमासान, EC का SIR अभियान शुरू

MP News: मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग (Election Commission) के नए कदम ने सियासी हलचल मचा दी है। आयोग ने मंगलवार से राज्य के 55 जिलों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की शुरुआत कर दी है। वहीं, कांग्रेस ने इस पहल को जल्दबाजी और पक्षपातपूर्ण कदम बताते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।

काम तेजी से शुरू

राज्य के उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन ने बताया कि अब मध्य प्रदेश में मतदाता सूचियों को अपडेट करने, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और गलत प्रविष्टियों को हटाने का काम तेज़ी से शुरू हो गया है। इसके लिए 65,014 मतदान केंद्रों पर ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) तैनात किए गए हैं, जो घर-घर जाकर मतदाता गणना प्रपत्र बांट रहे हैं।

पहले दिन का सफर

अभियान के पहले दिन बीएलओ ने तीन आवश्यक दौरों में से पहला चरण पूरा कर लिया है। इन फॉर्मों की जांच के बाद 9 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची जारी की जाएगी। आयोग के अनुसार, दावे और आपत्तियां 8 जनवरी 2026 तक ली जाएंगी और उनका निपटारा 31 जनवरी तक होगा। इसके बाद 7 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

देश के 12 राज्यों में एक साथ शुरू

यह अभियान करीब एक महीने तक चलेगा और इसका उद्देश्य है कि हर पात्र मतदाता का नाम सूची में दर्ज हो तथा अपात्र या दोहराए गए नाम हटाए जा सकें। आयोग ने बताया कि यह प्रक्रिया देश के 12 राज्यों में एक साथ शुरू की गई है ताकि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह अद्यतन की जा सके।लेकिन इस बीच कांग्रेस ने इस पहल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने कहा, “यह SIR अभियान जल्दबाजी में चलाया जा रहा है। ऐसा लगता है जैसे चुनाव आयोग अब भाजपा की कठपुतली बन चुका है और सत्ता पक्ष के इशारे पर मतदाता सूचियों में हेरफेर की तैयारी कर रहा है।”

विपक्ष का विरोध

वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि “चुनाव आयोग पारदर्शी तरीके से काम कर रहा है।” भाजपा ने भोपाल स्थित अपने कार्यालय में इस अभियान पर विशेष कार्यशाला भी आयोजित की, जिसमें बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए गए।राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों के बीच, यह SIR अभियान अब न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है — जहां एक ओर आयोग “साफ-सुथरी मतदाता सूची” का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे “लोकतंत्र से छेड़छाड़” बता रहा है।

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