Bhojshala Kamal Maula Mosque: मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला कमाल मौला मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी से ठीक पहले अहम आदेश जारी कर दिया है। लंबे समय से चले आ रहे विवाद के बीच शीर्ष अदालत ने ऐसा रास्ता निकाला है, जिससे टकराव की आशंका को टालते हुए दोनों समुदायों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान हो सके।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ कहा कि बसंत पंचमी के दिन जहां एक ओर पूजा-पाठ होगा, वहीं दूसरी ओर जुमे की नमाज भी अदा की जाएगी। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि दोनों धार्मिक आयोजनों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि कानून-व्यवस्था पर कोई असर न पड़े।
SC का फार्मूला
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि प्रशासन ने दोनों समुदायों के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग तय करने का सुझाव दिया है। कोर्ट ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कहा कि पूजा और नमाज के दौरान आने-जाने की व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित और सुरक्षित रहनी चाहिए। साथ ही मुस्लिम समुदाय से कहा गया है कि जुमे की नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या एक दिन पहले ही जिला मजिस्ट्रेट को सौंपी जाए, ताकि प्रशासन पास जारी कर सके और भीड़ नियंत्रण में आसानी हो।
दोनों समुदायों से शांति और भरोसे की अपील
मुख्य न्यायाधीश ने अपने आदेश में दोनों पक्षों से आपसी सम्मान, संयम और विश्वास बनाए रखने की अपील की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह का तनाव या उकसावे की स्थिति न बने, इसकी जिम्मेदारी सभी की है।
भोजशाला में सख्त नियम लागू
बसंत पंचमी के दिन दोनों धार्मिक अनुष्ठानों को देखते हुए प्रशासन ने भोजशाला में प्रवेश को लेकर कड़े आदेश जारी किए हैं। निर्देश के अनुसार पूजा या नमाज के लिए आने वाले लोग सिर्फ आवश्यक धार्मिक सामग्री ही साथ ला सकेंगे। मोबाइल फोन, बैग, कैमरा, पानी की बोतल जैसी वस्तुओं पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा किसी भी तरह के हथियार, विस्फोटक सामग्री या ज्वलनशील पदार्थ लाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। क्षेत्र में पेट्रोल और डीजल की खुले में बिक्री पर भी अस्थायी रोक लगा दी गई है।
सोशल मीडिया से लेकर जुलूस तक पर नजर
किसी भी तरह के धार्मिक उन्माद को रोकने के लिए प्रशासन ने सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर भी निगरानी बढ़ा दी है। भड़काऊ पोस्ट, वीडियो या संदेश फैलाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। रैली, जुलूस या धरना-प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
धार में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
तनाव की आशंका को देखते हुए धार जिले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। करीब 6,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जिसमें 13 एसपी स्तर के अधिकारी, 25 एएसपी और 933 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
ASI व्यवस्था के तहत पहले से तय है पूजा-नमाज
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों के मुताबिक, भोजशाला में हिंदू समुदाय को हर मंगलवार पूजा की अनुमति है, जबकि मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार जुमे की नमाज का अधिकार मिला हुआ है। बसंत पंचमी पर दोनों आयोजनों के एक साथ होने से विवाद गहराया था।
क्या है पूरा विवाद?
हिंदू पक्ष की ओर से भोज उत्सव समिति ने बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा की अनुमति मांगी थी। वहीं मुस्लिम पक्ष ने दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज की अनुमति के लिए प्रशासन को आवेदन दिया था। दोनों मांगों के आमने-सामने आने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
कमाल मौला मस्जिद इंतजामिया समिति का कहना है कि नमाज अदा करना उनका संवैधानिक अधिकार है और यह स्थल 1935 से मस्जिद घोषित है। वहीं भोज उत्सव समिति का दावा है कि बसंत पंचमी पर यहां पूजा सदियों पुरानी परंपरा है और अनुमति नहीं मिलने पर विरोध किया जाएगा।
फिलहाल राहत की सांस
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद फिलहाल टकराव की आशंका टल गई है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की व्यवस्था और दोनों समुदायों के संयम पर टिकी हैं, जिससे बसंत पंचमी का दिन शांति और सौहार्द के साथ गुजर सके।
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