Bhopal : मध्य प्रदेश में मंडी बोर्ड को 1500 करोड़ रुपये का लोन दिलाने के लिए उसकी संपत्तियों को गिरवी रखने की तैयारी ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मंडी बोर्ड के कर्मचारी और कर्मचारी नेता इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और 29 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी हड़ताल पर जाने की घोषणा की है।
कर्मचारी नेताओं ने इस संबंध में कृषि मंत्री किसान कंसाना को ज्ञापन सौंपकर शासन के निर्णय पर आपत्ति जताई है। मंत्री ने भी शासन को नोटशीट के माध्यम से इस प्रस्ताव पर असहमति दर्ज की है।
सुविधाओं और ग्रामीण विकास कार्यों
दरअसल, मंडी बोर्ड राज्य की सभी मंडियों में व्यापारियों से 1 प्रतिशत मंडी टैक्स वसूलता है। इस टैक्स से मिलने वाली राशि का उपयोग किसानों के हित में सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाओं और ग्रामीण विकास कार्यों में किया जाता है।
पूर्व में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में यह टैक्स दर 2 प्रतिशत थी, लेकिन चुनाव से पहले इसे घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया। इससे मंडी बोर्ड की आमदनी पर बड़ा असर पड़ा है।
सरकार ने पैसा वापस नहीं किया
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि शासन के पास मंडी बोर्ड की 500 करोड़ रुपये की राशि पहले से जमा है, जो ब्याज सहित अब 600 करोड़ रुपये हो चुकी है। उनका आरोप है कि यह पैसा सरकार ने अब तक वापस नहीं किया और इसका कोई स्पष्ट लेखा-जोखा भी उपलब्ध नहीं है।
कर्मचारियों का मानना है कि यदि सरकार मंडी बोर्ड को गिरवी रखकर 1500 करोड़ रुपये का लोन लेती है, तो इससे बोर्ड की वित्तीय स्थिति गंभीर संकट में आ जाएगी। ऐसी स्थिति में कर्मचारियों के वेतन पर असर पड़ सकता है और मंडी बोर्ड भी अन्य घाटे में चल रहे बोर्डों की तरह बंद होने की कगार पर पहुंच सकता है।
कर्मचारी संगठनों का सुझाव
यदि सरकार मंडियों में फिर से 2 प्रतिशत टैक्स दर लागू कर दे, तो राज्य को सालाना लगभग 1700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है। इसके साथ ही 600 करोड़ रुपये, जो पहले से शासन के पास जमा हैं, को मिलाकर सरकार को कुल 2300 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। इससे सरकार को लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और किसानों को भावांतर योजना का लाभ भी सुचारू रूप से मिल सकेगा।
कर्मचारियों की चेतावनी
कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार ने मंडी बोर्ड को गिरवी रखने का निर्णय वापस नहीं लिया, तो 29 अक्टूबर को पूरे प्रदेश की मंडियां बंद रहेंगी और सभी कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे।
अशोक पांडे, मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड कर्मचारी नेता ने कहा कि राज्य सरकार मंडी बोर्ड को 1500 करोड़ रुपये में गिरवी रखकर किसानों के लिए भावांतर योजना चलाने की तैयारी में है। इस निर्णय का मंडी बोर्ड कर्मचारी विरोध कर रहे हैं।
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कृषि मंत्री ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए कृषि उत्पादन आयुक्त को नोटिस भेजा है कि मंडी बोर्ड पर लोन न लिया जाए, क्योंकि इससे मंडी बोर्ड की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है और मंडियां बंद होने की नौबत आ सकती है।
कर्मचारी नेता अशोक पांडे ने कहा कि सरकार किसानों को खुश करने के प्रयास में कर्मचारियों की अनदेखी कर रही है। पहले भी कई बोर्ड लोन के बोझ से बंद हो चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि भावांतर योजना के लिए अलग से विशेष पैकेज लाया जाए, न कि मंडी बोर्ड को गिरवी रखकर किसानों की योजना चलाई जाए।

