मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में 50 वर्षीय ई-रिक्शा चालक की मौत का मामला सामने आया है। बीते कुछ समय से इलाके में दूषित पेयजल के कारण लगातार बीमारियों और मौतों की खबरें आ रही हैं। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि मृतक की मौत का कारण कैंसर से जुड़ी जटिलताएं थीं, न कि दूषित पानी।
मृतक हेमंत के छोटे भाई संजय गायकवाड़ ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में दावा किया कि उनके भाई की मौत खराब पानी पीने से हुई। उन्होंने बताया कि बीमारी के महज 15 दिनों के भीतर हेमंत की हालत बिगड़ गई और उनकी जान चली गई। संजय के मुताबिक, हेमंत परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और सरकार को उनके परिवार की आर्थिक मदद करनी चाहिए। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की।
प्रशासन का पक्ष
इस मामले में चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार हेमंत की मृत्यु कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट से हुई। उन्होंने बताया कि हेमंत कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था। अधिकारियों के अनुसार, कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट की स्थिति में दिल की धड़कन और सांस अचानक रुक जाती है, जिससे शरीर के अहम अंगों तक ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है।
गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार
हेमंत की अंतिम यात्रा बुधवार सुबह भागीरथपुरा स्थित उनके निवास से निकाली गई। इस दौरान पूरे इलाके में शोक का माहौल रहा। उनकी मां, पत्नी और चार बेटियों को सांत्वना देना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा था। परिवार की सबसे छोटी बेटी मनाली ने एक रिश्तेदार की सहायता से पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
हेमंत की बड़ी बेटी रिया ने बताया कि उनके पिता को दूषित पानी पीने के बाद दस्त की शिकायत हुई थी, जिसके चलते उन्हें पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
लंबे समय से जारी थी समस्या
भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से लोगों के बीमार पड़ने की शिकायतें दिसंबर के अंत से सामने आने लगी थीं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे काफी समय से इस समस्या से जूझ रहे थे, लेकिन नगर निगम को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अधिकारियों के अनुसार, इलाके के 51 ट्यूबवेल के पानी की जांच में दूषित पानी पाए जाने की पुष्टि हुई है। लैब रिपोर्ट में ई.कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि पीने के पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण शौचालय का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया था।
हाई कोर्ट में रिपोर्ट, मौतों का आंकड़ा
15 जनवरी को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में राज्य सरकार ने उल्टी-दस्त फैलने से सात मौतों की जानकारी दी थी। वहीं, शासकीय महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज द्वारा गठित कमेटी की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा में कम से कम 15 मौतें इस बीमारी के प्रकोप से जुड़ी हो सकती हैं।
प्रशासन ने उल्टी और दस्त से जान गंवाने वाले 21 लोगों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है। इनमें से कुछ मामलों में मौत अन्य बीमारियों के कारण हुई थी, लेकिन मानवीय आधार पर मुआवजा दिया गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि दूषित पानी से मरने वालों की संख्या 25 तक पहुंच चुकी है, हालांकि नगर निगम अधिकारियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
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