Bijnor Dog News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना तहसील स्थित नंदपुर गांव में पिछले कुछ दिनों से एक कुत्ता लोगों की आस्था और भावनाओं का केंद्र बना हुआ था। हनुमान जी और मां दुर्गा की मूर्तियों के चारों ओर लगातार चक्कर लगाता यह कुत्ता लोगों को किसी चमत्कार जैसा लगने लगा। स्थानीय ग्रामीणों ने उसे भैरव बाबा का अवतार मान लिया और उसकी पूजा शुरू कर दी। लेकिन अब इस घटना की असली सच्चाई सामने आ चुकी है।
लगातार दो दिनों तक हनुमान जी की मूर्ति का चक्कर लगाने के बाद कुत्ता मां दुर्गा की प्रतिमा के चारों ओर घूमने लगा। यह दृश्य देखकर गांव में चर्चा फैल गई और देखते ही देखते मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग उसे प्रणाम करने लगे, मन्नतें मांगने लगे और पूजा-पाठ करने लगे।
आस्था के नाम पर हालत खराब
इस बीच कुत्ते की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। वह करीब पांच दिनों तक कुछ खा-पी नहीं पाया और लगातार घूमते-घूमते बेहद कमजोर हो गया। ठंड से बचाने के लिए मंदिर कमेटी ने उसे रजाई ओढ़ा दी, लेकिन इसके बावजूद लोगों की भीड़ कम नहीं हुई। कुत्ता पूरी तरह थक चुका था, फिर भी आस्था के नाम पर लोग उसे उसी हालत में देखने आते रहे।
चौंकाने वाली सच्चाई खुलासा
मामले की जानकारी मिलने पर NGO प्रेमपथ की टीम मौके पर पहुंची। संस्था की संचालक संध्या रस्तोगी, अश्वनी चित्रांश और उनकी टीम ने कुत्ते की जांच की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। डॉक्टरों ने बताया कि कुत्ता किसी चमत्कार का हिस्सा नहीं, बल्कि वह एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से पीड़ित है। इसी बीमारी के कारण वह लगातार एक ही दिशा में घूम रहा था।
लोगों का अंधविश्वास
तत्काल राहत के तौर पर मंदिर परिसर में ही कुत्ते को फ्रूट थैरेपी ड्रिप लगाई गई, जिससे उसकी हालत में थोड़ा सुधार हुआ। इसके बाद भी मंदिर में दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लगी रही। काफी समझाने-बुझाने के बाद एनजीओ ने मंदिर कमेटी को राजी किया और कुत्ते को बेहतर इलाज के लिए नोएडा स्थित शिवालय वेलनेस सेंटर ले जाया गया।
जांच के लिए दिल्ली आया कुत्ता
अब कुत्ता डॉक्टरों की निगरानी में है और उसकी हालत धीरे-धीरे सुधर रही है। एक रात के इलाज के बाद उसने करीब ढाई सौ ग्राम पनीर भी खाया, जो उसके लिए एक बड़ी राहत की खबर है। फिलहाल उसे एमआरआई जांच के लिए दिल्ली ले जाया गया है, ताकि बीमारी की पूरी वजह सामने आ सके और उसका सही इलाज हो सके।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा कितनी पतली होती है। राहत की बात यह है कि अब “चमत्कार” समझे गए इस कुत्ते को समय पर इलाज मिल गया है, और वह धीरे-धीरे जिंदगी की ओर लौट रहा है।

