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स्वच्छता का दावा और गंदे पानी की हकीकत! इंदौर जल त्रासदी की सस्पेंस कहानी, अब तक 12 की मौत

Indore Waterborne Diseases: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में एक भयावह जल संकट ने लोगों की जिंदगी को हिला कर रख दिया है। गंदे पानी की वजह से अब तक कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 162 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं और 26 की हालत गंभीर है। इन मौतों और बीमारियों की पुष्टि प्रभावित परिवारों ने की है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इसे पूरी तरह से मानने से इनकार किया है।

क्या है पूरा मामला

भागीरथपुरा के निवासी बताते हैं कि पानी में गंदगी और लीकेज के कारण पीने के पानी में नाले का दूषित पानी मिल गया, जिससे पूरे इलाके में उल्टी और दस्त जैसी बीमारी फैल गई। प्रभावितों में सबसे दुखद मामला पांच महीने के मासूम अव्यान का है, जिसकी मौत इसी दूषित पानी की वजह से हुई। बच्चे की मां ने दूध को गाढ़ा करने के लिए पानी मिलाया था, लेकिन नगर निगम के नलों से आने वाला पानी मासूम के लिए जहर बन गया।

क्या है सरकार की तैयारी

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मृतकों की संख्या पर फिलहाल टिप्पणी करना मुश्किल है, लेकिन प्रभावित परिवारों को 2 लाख रुपये प्रति परिवार सहायता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी मरीजों का इलाज किया जा रहा है, पांच एम्बुलेंस तैनात की गई हैं और अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध कराए गए हैं। प्रशासन ने अरविंद और एमवाई अस्पताल में 100-100 बिस्तर वाले वार्ड बनाए हैं। गंभीर मरीजों को चाचा नेहरू अस्पताल भेजा गया है।

स्वास्थ्य विभाग का एक्शन

वहीं, स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में 21 टीमों का गठन किया है, जिनमें डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, ए.एन.एम. और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं। इन टीमों ने घर-घर जाकर लोगों को उबला पानी पीने और बाहर के कटे फल न खाने की चेतावनी दी। इसके अलावा, प्रभावित क्षेत्र में 11 एम्बुलेंस और 24×7 चिकित्सकीय ड्यूटी लगाई गई है।

अब तक का सर्वे बताता है कि 7,992 घरों और लगभग 39,854 लोगों की जांच की गई, जिनमें 2,456 लोग संदेहास्पद पाए गए। प्रारंभिक उपचार स्थल पर ही किया गया और 212 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें से 50 मरीज डिस्चार्ज भी हो चुके हैं।

कहां तक फैला है गंदे पानी का जाल

इसके अलावा, प्रशासनिक जानकारी के अनुसार शहर के अन्य हिस्सों में भी दूषित पानी की शिकायतें मिली हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि पानी की पाइपलाइन में लीकेज के कारण नाले का गंदा पानी मिला। इससे प्रभावित इलाके में 1100 से ज्यादा लोग बीमार हुए और अभी भी लगभग 150 मरीज अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने अब तक 7 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि एक सप्ताह में 12 मौतें हुई हैं। इनमें छह महिलाएं और एक पांच महीने का भी बच्चा शामिल हैं।

स्थिति सामान्य होने की संभाव

मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि यह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का इलाका है, इसलिए निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई है। साथ ही, लोगों को नर्मदा का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और घर-घर क्लोरीन वितरित की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि दूषित पानी के स्रोत का इलाज किया जा रहा है और एक-दो दिन में स्थिति सामान्य होने की संभावना है।

स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि निजी अस्पतालों में भी निःशुल्क उपचार, जांच और दवाओं की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिला प्रशासन ने निजी चिकित्सालयों में राजस्व अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक तैनात किए हैं, ताकि इलाज में कोई बाधा न आए।

स्वच्छता की छवि पड़ी धुंधली

भागीरथपुरा में जारी इस जल त्रासदी ने इंदौर की स्वच्छता की छवि को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहां शहर को ‘देश का सबसे स्वच्छ शहर’ कहा जाता है, वहीं गंदे पानी की वजह से लोगों की जान जा रही है। इस संकट ने यह साफ कर दिया है कि स्वच्छता सिर्फ आंकड़ों में नहीं, बल्कि हर घर के पानी में भी होनी चाहिए। इंदौर की भागीरथपुरा जल त्रासदी ने यह साबित कर दिया है कि स्वच्छता के दावे के बावजूद अगर पीने के पानी की सुरक्षा नहीं होती, तो परिणाम भयावह हो सकते हैं। प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए हैं, लेकिन परिवारों का दर्द और मासूमों की जान नहीं लौट सकती।

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