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जमीन के नीचे छिपा काला सोना! कटनी की खोज बदल सकती है MP की तस्वीर, ड्रिलिंग बताएगी असली सच

Katni Coal Reserves: मध्यप्रदेश के कटनी जिले की पहचान अब केवल चूना पत्थर और सोने तक सीमित नहीं रहने वाली। जिले में अब ऐसे संकेत मिले हैं, जो कटनी को प्रदेश का अगला बड़ा खनिज हब बना सकते हैं। सोने के बाद अब यहां कोयले के विशाल भंडार मिलने की पुष्टि हुई है, जिसने शासन से लेकर भू-वैज्ञानिकों तक सभी की उत्सुकता बढ़ा दी है।

कोयले के सैंपल

कटनी-जबलपुर की पांच सदस्यीय तकनीकी टीम ने बड़वारा विकासखंड के ग्राम पंचायत लोहरवारा स्थित उमरार नदी के किनारे पहुंचकर जांच की, जहां जमीन के नीचे कोयले की मोटी परत होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं। मौके से कई स्तरों पर कोयले के सैंपल एकत्र किए गए, जिनकी प्रारंभिक रिपोर्ट बेहद उत्साहजनक बताई जा रही है। जबलपुर से पहुंचे क्षेत्रीय प्रमुख अधिकारी संजय धोपेश्वर, सहायक भौमिकीविद विमलेश चौधरी, कटनी खनिज उपसंचालक रत्नेश दीक्षित और सहायक खनिज अधिकारी पवन कुशवाहा सहित विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि शुरुआती जांच में यहां थर्मल और स्टीम क्वॉलिटी का कोयला पाया गया है, जो बिजली उत्पादन और औद्योगिक उपयोग के लिए काफी उपयोगी माना जाता है।

व्यापक ड्रिलिंग की तैयारी

हालांकि कोयले की वास्तविक गहराई और क्षेत्रफल का पता लगाने के लिए अब व्यापक ड्रिलिंग की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, विभिन्न स्थानों पर 50 से 80 मीटर तक ड्रिलिंग कर यह जांच की जाएगी कि जमीन के नीचे कोयले की कितनी लेयर मौजूद है और यह कितने बड़े इलाके में फैला हुआ है। फिलहाल अनुमान है कि यह भंडार काफी विस्तृत क्षेत्र में हो सकता है, लेकिन अंतिम तस्वीर GIS रिपोर्ट के बाद ही साफ होगी। खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि ड्रिलिंग और विस्तृत जांच रिपोर्ट सकारात्मक रहती है, तो कटनी जिले को जल्द ही अपनी पहली बड़ी कोल माइंस मिल सकती है। इससे न केवल मध्यप्रदेश शासन को बड़ा राजस्व लाभ होगा, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी खुल सकते हैं।

सोने और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स

गौरतलब है कि करीब पांच महीने पहले कटनी में आयोजित माइनिंग कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में 56,400 करोड़ रुपये के एमओयू साइन हुए थे। उस दौरान जिले में सोने और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स की संभावनाएं सामने आई थीं। अब कोयले के संकेत मिलने से कटनी की खनिज क्षमता और भी मजबूत हो गई है। अब सबकी नजरें आने वाले दिनों में होने वाली ड्रिलिंग और GIS रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि कटनी की धरती के नीचे छिपा यह खजाना कितना बड़ा है और क्या वाकई कटनी मध्यप्रदेश का अगला खनिज पावरहाउस बनने जा रहा है।

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