होम = State = मध्य प्रदेश = ₹150 की ‘कार्बाइड गन’ से उजड़ी दिवाली! भोपाल में 125 लोगों की आंखों की रोशनी छिनी, बच्चों पर टूटी आफत

₹150 की ‘कार्बाइड गन’ से उजड़ी दिवाली! भोपाल में 125 लोगों की आंखों की रोशनी छिनी, बच्चों पर टूटी आफत

MP News: मध्य प्रदेश के भोपाल में इस दिवाली खुशियों की रोशनी के बीच एक सस्ती लेकिन जानलेवा जुगाड़ ने कई परिवारों की जिंदगी अंधेरे में धकेल दी। सिर्फ ₹150-₹200 में मिलने वाली कैल्शियम कार्बाइड गन अब मौत और विकलांगता का कारण बन रही है। अस्पतालों से मिले आंकड़े बताते हैं कि इस देसी विस्फोटक गन से अब तक 125 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें ज्यादातर 8 से 14 साल के बच्चे हैं। कई की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई है।

क्या है ये ‘कार्बाइड गन’?

यह गन किसी फैक्ट्री में नहीं, बल्कि घरों और गलियों में जुगाड़ से बनाई जाती है। गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और कैल्शियम कार्बाइड इसके मुख्य हिस्से हैं। पाइप में भरा कार्बाइड जब पानी के संपर्क में आता है तो एसिटिलीन गैस पैदा होती है। लाइटर से एक छोटी सी चिंगारी मिलते ही तेज धमाका होता है और पाइप फट जाता है। इससे निकलने वाले प्लास्टिक के तेज टुकड़े (छर्रे) सीधे आंखों और चेहरे में जा घुसते हैं। कई बच्चे जिज्ञासा में झांकते हैं और उसी पल विस्फोट हो जाता है।

अस्पतालों में चीख-पुकार

भोपाल के अस्पतालों में इस साल दिवाली के बाद मरीजों की लंबी कतारें लगीं। डॉक्टरों के मुताबिक, करीब 30% मरीजों की आंखों में गंभीर क्षति हुई है। कुछ को कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी, जबकि कई को तत्काल ऑपरेशन करना पड़ा। नेत्र विशेषज्ञ ने बतया की- इस बार हमने एक नई तरह की इंजरी देखी कार्बाइड बम से केमिकल बर्न। कई मामलों में आंख की अंदरूनी संरचना तक जल गई। 20-30% मरीजों की दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुंचा है।”

प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह हादसे सिर्फ बच्चों की लापरवाही नहीं, बल्कि सस्ती और आसानी से उपलब्ध खतरनाक सामग्री का नतीजा हैं। सरकार को तुरंत बाजारों में कैल्शियम कार्बाइड की बिक्री पर नियंत्रण लगाना चाहिए। साथ ही स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाने और दुकानदारों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत है। भोपाल की यह काली दिवाली चेतावनी है की त्योहारों की खुशी अगर सावधानी से न मनाई जाए, तो एक पल में जिंदगी अंधेरे में डूब सकती है।

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