होम = State = मध्य प्रदेश = चपरासी बना ‘फर्जी डॉक्टर’! भ्रूण लिंग जांच के धंधे से कमा रहा था लाखों, ऐसे हुआ पर्दाफास

चपरासी बना ‘फर्जी डॉक्टर’! भ्रूण लिंग जांच के धंधे से कमा रहा था लाखों, ऐसे हुआ पर्दाफास

MP News: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शख्स, जो असल में शिक्षा विभाग में चपरासी था, खुद को डॉक्टर बताकर अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच का धंधा कर रहा था। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने इस फर्जी डॉक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान संजू शर्मा (30) के रूप में हुई है, जो लंबे समय से इस गैरकानूनी नेटवर्क को चला रहा था और लाखों रुपये की कमाई कर चुका था।

कैसे खुली फर्जी डॉक्टर की पोल

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मेश उपाध्याय को सूचना मिली थी कि गदौरा पुरा इलाके में एक व्यक्ति घर-घर जाकर पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से भ्रूण लिंग जांच कर रहा है। इस पर कलेक्टर लोकेश जांगिड़ के निर्देश पर ग्वालियर और मुरैना की संयुक्त टीम ने सामाजिक कार्यकर्ता मीना शर्मा के सहयोग से जाल बिछाया। एक डमी गर्भवती महिला और सादे कपड़ों में महिला पुलिसकर्मी को जांच के बहाने आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही संजू ने जांच शुरू की, टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

घर-घर जाकर करता था भ्रूण जांच

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त की। पूछताछ में पता चला कि संजू शर्मा 2 से 4 हजार रुपये लेकर गर्भवती महिलाओं का लिंग परीक्षण करता था। अगर भ्रूण लड़की निकलता था तो वह गर्भपात कराने के लिए बड़ी रकम वसूलता था। सामाजिक कार्यकर्ता मीना शर्मा के अनुसार, यह नेटवर्क मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक फैला हुआ था।

शिक्षा विभाग में चपरासी

जांच में खुलासा हुआ कि संजू शर्मा पहले जिला शिक्षा विभाग के बिलगांव मिडिल स्कूल में चपरासी था। नवंबर 2024 में संदिग्ध गतिविधियों के चलते उसे निलंबित किया गया था, जिसके बाद उसने खुद को “डॉक्टर” बताकर यह गैरकानूनी धंधा शुरू कर दिया। डॉ. प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी पर पिछले छह महीनों से नजर रखी जा रही थी। जयपुर में एक आरोपी के पास से जब पोर्टेबल मशीन बरामद हुई थी, तो उसने बताया था कि यह मशीन संजू शर्मा के लिए लाई गई थी। इसके बाद से टीम लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

जिले में सबसे कम लिंगानुपात

अधिकारियों के अनुसार, मुरैना उन जिलों में शामिल है जहां लिंगानुपात सबसे कम रहा है। 2011 की जनगणना में यहां प्रति हजार पुरुषों पर 840 महिलाएं थीं, जो अब बढ़कर 922 हो चुकी हैं। अधिकारी मानते हैं कि ऐसे फर्जी डॉक्टर इस अनुपात में सुधार की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं।

ये भी पढ़े:  पाकिस्तान-तालिबान के बीच भिड़ंत, रातभर गूंजती रहीं गोलियों की आवाज, चौकियां तबाह, टैंक उड़ाया गया