Jharkhand News: झारखंड के दुमका जिले में लोक आस्था का महापर्व छठ पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। रविवार की शाम खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद अब छठव्रती महिलाएं सोमवार की संध्या को अस्ताचल सूर्य को पहला अर्घ्य देने की तैयारियों में जुट गई हैं। सुबह से ही दुमका शहर और ग्रामीण इलाकों में त्योहार जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। बाजारों में सूप, दउरा, नारियल, गन्ना, ठेकुआ और अन्य पूजन सामग्रियों की खरीददारी को लेकर भारी भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं पारंपरिक वस्त्रों में सजी दिखाई दीं, वहीं पुरुष घाटों की साफ-सफाई और सजावट में लगे रहे।
दुल्हन जैसे सजे सभी घाट
शहर के बड़ा बांध, छठ घाट तालाब, खुटाबांध, बंदरजोड़, लखीकुंडी, महुआडंगाल और रसीकपुर घाटों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। घाटों पर रंगीन झालरों, दीपों और केले के पत्तों से सुंदर सजावट की गई है। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए गए हैं। हर घाट पर पुलिस बल, गोताखोर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। छठव्रतियों का कहना है कि चार दिन तक चलने वाला यह पर्व संयम, पवित्रता और आस्था का प्रतीक है। व्रती महिलाएं आज शाम अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देने के बाद अगले दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी।
छठ मइया की भक्ति में डूबा शहर
पूरा दुमका जिला इस समय छठ मइया की भक्ति में डूबा हुआ है। घाटों से ‘कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगिया लचकत जाए’ जैसे भजनों की गूंज सुनाई दे रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस महापर्व की पवित्रता में डूबा है। दुमका के घाटों की चमक और व्रतियों की आस्था ने पूरे शहर को भक्ति के रंग में रंग दिया है और आज हर घाट दुल्हन-सा दमक रहा है।
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