Leh Protest: लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद हालिया हिंसा ने हालात तनावपूर्ण बना दिए हैं। शनिवार को लेह में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू रहे।
पांच से अधिक लोगों के जुटने पर रोक
आधिकारिक आदेशों के मुताबिक, जिले में पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, रैली या जुलूस निकालने पर पाबंदी है। किसी भी तरह के आयोजन के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। इलाके में सुरक्षाबल तैनात हैं।
हिंसा और मौत
चार सितंबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान लेह में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें स्थानीय भाजपा कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया। इस झड़प में चार लोगों की मौत हो गई। इसके दो दिन बाद, प्रशासन ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में ले लिया। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप है।
वांगचुक की प्रतिक्रिया
गिरफ्तारी से पहले वांगचुक ने कहा था कि उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा— “अगर मेरी गिरफ्तारी से लोग इस मुद्दे को लेकर जागरूक होते हैं तो मुझे खुशी होगी। लोग देखेंगे कि जिस व्यक्ति ने देश का गौरव बढ़ाया, वह जेल में है और समझेंगे कि देश किस तरह चल रहा है। शायद यह देश की सेवा का मेरा आखिरी दौर होगा।”
उन्होंने दावा किया कि प्रशासन उन पर जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत भी मामला दर्ज करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत उन्हें बिना मुकदमे और जमानत के दो साल तक जेल में रखा जा सकता है।
सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सामान्य जीवन बहाल करने के प्रयास जारी हैं। यदि स्थिति शांत रही तो सोमवार से स्कूल और कॉलेज खोले जा सकते हैं। भरोसा बहाल होने के बाद चरणबद्ध तरीके से सभी प्रतिबंध हटाने की योजना है।
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