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Kishtwar tragedy : मलबे के बीच जिंदगी की तलाश जारी, उमर अब्दुल्ला ने पीड़ितों को दिया साहारा

Kishtwar tragedy : 14 अगस्त 2025 की दोपहर को किश्तवाड़ जिले के चशोटी (Chositi) गांव में अचानक बादल फटने से तेज पानी और मलबा एक पर्वतीय तीर्थयात्रा स्थल पर गिरा। यह इलाका मचैल माता यात्रा का आखिरी मोटरेबल गांव था, जहां श्रद्धालु रुकते थे। CM उमर अब्दुल्ला ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। अब तक 65 से अधिक बॉडीज बरामद हुई है। और कई लोग लापता है।

एक यात्री ने बताया घटना के बारे में

एक बचे हुए यात्री ने बताया, “यह घटना एक धमाके जैसा था। कुछ ही सेकंड में सबकुछ उजड़ गया।” पानी और मलबा इतनी तेजी से आया कि बचने का मौका भी नही मिला। मलबे में तैरते हुए सामान, टूटे पुल, बिखरी हुई वस्तुएं और आधी दबी कारें यह बता रही हैं कि तबाही कितनी विनाशकारी थी।

तबाही और आकड़े

मृतकों की संख्या 65 से अधिक है, इनमें दो CISF जवान भी शामिल हैं। लगभग 300 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है। 200 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं और मलबे में फंसे होने की आशंका बनी हुई है।

CM उमर अब्दुल्ला किश्तवाड़ पहुंचे और कहा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला शनिवार सुबह किश्तवाड़ जिले के चसोटी पहुंचे, जहां हाल ही में आए फ्लैश फ्लड से भारी तबाही मची है। सबसे पहले उन्होंने गुलाबगढ़ का दौरा किया और उसके बाद चसोटी गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया। CM उमर अब्दुल्ला ने मौके पर प्रभावित परिवारों, घायलों और राहत-बचाव कार्य में जुटे अफसरों से मुलाकात की।

उन्होंने आगे कहा राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद हम जांच करेंगे कि जब मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया था, तब क्या प्रशासन कोई प्रिवेंटिव स्टेप्स ले सकता था। NDRF, SDRF, पुलिस और प्रशासन मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी जमीनी स्तर पर मदद कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर स्थिति का जायजा लिया और पूरे जिले में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

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राहत और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन बल (NDRF, SDRF), जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना, स्थानीय प्रशासन, और स्वयंसेवक राहत कार्यों में जुटे हैं। कई भारी मशीनरी, जैसे कि earthmovers, खोदने वाले उपकरण, रस्सियां इत्यादि का उपयोग किया जा रहा है। अब तक लगभग 167–300 लोगों को बचाया जा चुका है। राहत प्रयास मलबे में फंसे लोगों और मृतकों को निकालने में लगे है और राहत केंद्रों एवं हेल्पलाइनों की स्थापना की गई है।

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