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जम्मू-कश्मीर सरकार का बड़ा फैसला, आतंकवाद बढ़ाने वाली 25 Books बैन

Jammu-Kashmir News: जम्मू-कश्मीर सरकार ने अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली 25 किताबों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि ये किताबें झूठे विमर्श को बढ़ावा देती हैं, युवाओं को भड़काती हैं और आतंकवाद का महिमामंडन करती हैं।

इन किताबों को किया गया बैन

जिन किताबों पर प्रतिबंध लगाया गया है, उनमें मौलाना मौदादी की अल जिहादुल फिल इस्लाम, क्रिस्टोफर स्नेडेन की इंडिपेंडेंट कश्मीर(Independent Kashmir), डेविड देवदास की इन सर्च ऑफ ए फ्यूचर(In search of a future), विक्टोरिया स्कोफील्ड की कश्मीर इन कॉन्फ्लिक्ट(Kashmir in Conflict), ए.जी. नूरानी की कश्मीर डिस्प्यूट (1947–2012), अरुंधति रॉय की आजादी (Azadi) शामिल हैं।

गृह विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, ‘सरकार के संज्ञान में आया है कि कुछ साहित्य जम्मू-कश्मीर में झूठे विमर्शों और अलगाववाद का प्रचार करते हैं।’

युवाओं की कट्टरतावादी सोच को देती है बढ़ावा

बता दें कि राज्य गृह विभाग के मुख्य सचिव चंद्रेकर भारती ने कहा अगर कोई साहित्य ऐतिहासिक घटना या राजनीतिक टिप्पणी से जोड़कर लिखा जाता है। वह युवाओं की कट्टरतावादी सोच, हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देता है। ऐसा साहित्य स्थानीय लोगों में पीड़ित होने के भय और आतंकवादी को बढ़ावा देता है। ऐसा साहित्य स्थानीय लोगों में पीड़ित होने के भय को बढ़ावा देता है और आतंकवादी वीरता की संस्कृति को बढ़ाकर युवाओं की मानसिकता पर गहरा प्रभाव छोड़ता है।”

उन्होंने बोला कि इन किताबों ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को कट्टरपंथ की तरफ मोड़ने में भी भूमि निभाई है। इनमें ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

बता दें कि फिलहाल इन सभी  किताबों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 98 के तहत जब्त कर लिया गया है। सरकार के मुताबिक इन किताबों को अलगाववाद को बढ़ाने वाली और भारत की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने वाला पाया गया है। इसलिए इन पर धारा 152, 196 और 197 के तहत बैन लगाया गया है।

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