Yogi Adityanath Japan visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिंगापुर और जापान की चार दिवसीय यात्रा को केवल एक निवेश दौरे के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह दौरा आर्थिक कूटनीति, राजनीतिक संदेश और 2029-30 तक 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को एक साथ जोड़ने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। व्यापारिक शिखर सम्मेलनों में 15 लाख करोड़ रुपये के एमओयू और 25 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने का दावा किया है।
चुनावी साल से पहले ‘विकास’ का बड़ा नैरेटिव
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह दौरा राजनीतिक रूप से भी अहम है। बीजेपी पहले ही ‘डबल इंजन सरकार’ और ‘योगी हैं तो यूपी है’ जैसे नारों के जरिए शासन और विकास को चुनावी मुद्दा बना चुकी है। विदेशों में निवेश समझौतों की घोषणा यह संदेश देती है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और नीति-स्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय भरोसा हासिल किया है। चुनावी परिप्रेक्ष्य में यह सरकार के विकास मॉडल को मजबूत आधार देने की कोशिश है।
पीएम मोदी के विजन से तालमेल
यह पूरा प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यू इंडिया’ और ‘मेक इन इंडिया’ विजन के साथ जुड़ा हुआ है। केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति को राज्यों तक विस्तार देने की रणनीति के तहत यूपी खुद को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है। जापान के साथ ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, ऑटो कंपोनेंट्स और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में वार्ता तथा सिंगापुर के साथ एमआरओ और लॉजिस्टिक्स हब पर जोर, इसी व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि का हिस्सा है।
टेक्नोलॉजी + इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल
जापान में जापान सिटी, हरित हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र और ऑटो क्लस्टर जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को हाई-टेक और मैन्युफैक्चरिंग हब में बदलने की दिशा दिखाती हैं। सिंगापुर में जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को एमआरओ और कार्गो हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पश्चिमी यूपी को आर्थिक इंजन बनाने की योजना से जुड़ी है। इन पहलों से रोजगार, कौशल विकास और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने का लक्ष्य है, जो सीधे तौर पर युवा और मध्यम वर्गीय वोटरों को प्रभावित कर सकता है।
कितने लोगों को मिल सकता है रोजगार?
सरकारी आकलनों और पूर्व निवेश शिखर सम्मेलनों के अनुभवों के आधार पर अनुमान है कि बड़े मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और ऑटो क्लस्टर परियोजनाओं से 10–12 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, एमआरओ हब, ग्रीन हाइड्रोजन और एमएसएमई सेक्टर के विस्तार से 20–25 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बन सकते हैं। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 30–35 लाख रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
युवाओं और चुनावी राजनीति पर असर
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले रोजगार का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इन परियोजनाओं के तहत औद्योगिक इकाइयां स्थापित होती हैं और स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के साथ नौकरी मिलती है, तो यह सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ साबित हो सकता है। जापान सिटी, हरित हाइड्रोजन उत्कृष्टता केंद्र और जेवर एयरपोर्ट आधारित एमआरओ व कार्गो हब जैसी परियोजनाएं पश्चिमी और मध्य यूपी में औद्योगिक गतिविधि बढ़ाएंगी। इससे क्षेत्रीय संतुलित विकास और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन संभव हो सकता है।
प्रवासी भारतीयों के बीच राजनीतिक संदेश
जापान और सिंगापुर में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बदलती छवि, निवेश-अनुकूल वातावरण और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया। प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच यह संदेश देना कि यूपी अब अवसरों की धरती बन चुका है, वैश्विक ब्रांडिंग का हिस्सा है। साथ ही, यह राजनीतिक तौर पर यह भी दर्शाता है कि राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भूमिका निभा रही है।
असली चुनौती
हालांकि, बड़े निवेश समझौतों को जमीनी परियोजनाओं में बदलना सबसे बड़ी परीक्षा होगी। भारत के कई राज्यों में एमओयू साइन हुए, लेकिन उनका पूरा कार्यान्वयन नहीं हो पाया। यदि घोषित निवेश धरातल पर उतरते हैं, तो यह 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को गति देगा और चुनावी माहौल में सरकार के लिए मजबूत उपलब्धि साबित होगा।
विकास की राजनीति का नया मॉडल
योगी आदित्यनाथ का यह दौरा दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति अब केवल पारंपरिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक प्रतिस्पर्धा, वैश्विक साझेदारी और निवेश आकर्षण को भी केंद्रीय स्थान दे रही है। ‘योगी हैं तो यूपी है’ का नारा अब केवल प्रशासनिक सख्ती तक सीमित नहीं, बल्कि आर्थिक विस्तार और वैश्विक निवेश से जुड़कर एक व्यापक राजनीतिक ब्रांड में बदलता दिख रहा है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निवेश और विकास का यह नैरेटिव मतदाताओं को कितना प्रभावित करता है।

