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धर्मशाला कॉलेज में रैगिंग और यौन उत्पीड़न के बाद छात्रा की मौत, प्रोफेसर और तीन छात्राओं पर FIR दर्ज

Himachal Ragging Case: धर्मशाला के राजकीय महाविद्यालय में एक छात्रा की दुखद मौत ने पूरे हिमाचल में हड़कंप मचा दिया है। मामला सिर्फ रैगिंग का नहीं बल्कि यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का भी है। 19 साल की स्टूडेंट बीए फस्ट ईयर में पढ़ती थी और पिछले कुछ महीनों से लगातार मानसिक दबाव में थी। पुलिस के अनुसार, छात्रा को उसके सहयोगियों तीन सीनियर छात्राओं हर्षिता, आकृति और कोमोलिका ने जाति के आधार पर प्रताड़ित किया। 18 सितंबर, 2025 को यह प्रताड़ना चरम पर पहुंच गई। इसके अलावा, कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार पर भी छात्रा ने अश्लील हरकतों का आरोप लगाया था।

शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं

परिवार के अनुसार, छात्रा की मानसिक स्थिति तेजी से बिगड़ती गई। घर में वह अक्सर तनाव और अवसाद (डिप्रेशन) की स्थिति में नजर आने लगी थी। पिता ने कॉलेज प्रशासन को समय-समय पर इसकी जानकारी दी और कार्रवाई का आश्वासन भी लिया गया। लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। छात्रा के पिता ने 20 दिसंबर, 2025 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करवाई थी। पुलिस ने इस शिकायत की जांच की, लेकिन छात्रा डिप्रेशन के चलते बयान देने में सक्षम नहीं थी। बाद में छात्रा को उपचार के लिए डीएमसी, लुधियाना में भर्ती कराया गया। दुर्भाग्यवश, 26 दिसंबर, 2025 को उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

छात्रा की मौत के बाद, सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ जिसमें उसकी स्थिति और आरोप स्पष्ट रूप से सामने आए। इस वीडियो की पड़ताल के बाद पुलिस ने मामला गंभीरता से लेते हुए अब FIR दर्ज कर ली है। इसमें प्रोफेसर अशोक कुमार और तीन छात्राओं को आरोपी बनाया गया है। पुलिस अधीक्षक कांगड़ा, अशोक रत्न ने बताया कि वीडियो में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है। साथ ही यह देखा जाएगा कि कॉलेज प्रशासन, छात्रा के सहयोगी और प्रोफेसर की क्या भूमिका रही। इस मामले की पड़ताल में छात्रा के पिता और कॉलेज प्रशासन के बयान भी शामिल होंगे।

रैगिंग और यौन उत्पीड़न के खिलाफ नई बहस

घटना ने राज्य में शिक्षा संस्थानों में रैगिंग और यौन उत्पीड़न के खिलाफ नई बहस को जन्म दे दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। वहीं, पुलिस ने कॉलेज में सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने का ऐलान किया है। यह मामला छात्रों, शिक्षकों और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी की गंभीरता को उजागर करता है। अब प्रदेश में शिक्षा संस्थानों की नीतियों, सुरक्षा मानकों और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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