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Gujarat News: फर्जी CBI – कोर्ट रूम बनाकर 46 लाख लूटने की कोशिश, सूरत साइबर पुलिस ने समय रहते बचाया

by | Nov 21, 2025 | गुजरात

Gujarat News: गुजरात के सूरत में साइबर क्राइम पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बता दें कि पुलिस ने एक बड़ी ठगी को समय रहते रोक लिया। मिली जानकारी के अनुसार सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अमित देसाई को साइबर ठगों के अपने जाल में फंसाने का प्लान बनाया था। लेकिन पुलिस की सुझ-भूझ ने रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को जाल में फंसने से बचा लिया।

बता दें कि ठगों ने रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को वीडियो कॉल पर 72 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा हुआ था। इतना ही नहीं उनकी जीवनभर की कमाई के 46 लाख रुपये ट्रांसफर करवाने की पूरी तैयारी ठगों ने कर ली थी।

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2022 में रिटायर हुए अमित देसाई मई में कनाडा से लौटे थे। जिसके बाद उन्हें एक लोकल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस और CBI अधिकारी बताया। उसने कहा कि उनके आधार कार्ड और बैंक अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। इसके साथ ही कॉल पर कहा गया कि कुख्यात आरोपी नरेश गोयल से जुड़े 45 करोड़ के घोटाले में उनके डॉक्यूमेंट्स भी शामिल हैं।

यह बात सुनकर बुजुर्ग घबरा गए। थोड़ी ही देर में उनके मोबाइल पर SBI, CBI और अन्य एजेंसियों के नाम पर नकली लेटरहेड, नोटिस और वारंट भेजे जाने लगे। इन फर्जी दस्तावेज़ों ने उन्हें यकीन दिला दिया कि मामला गंभीर है।

साइबर ठगों का फिल्मी ‘वर्चुअल कोर्ट’

इसके बाद ठगों ने अमित देसाई को वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया। वीडियो कॉल पर एक नकली कोर्ट रूम बनाया गया, जिसमें जज, वकील, बैंक मैनेजर और CBI अधिकारी जैसे लोग दिखाई दे रहे थे। यह सब एक अच्छी तरह तैयार किया गया ड्रामा था, जो पूरी तरह असली लग रहा था। तो बस ठगों ने डराकर बुजुर्ग को अपनी प्रॉपर्टी बेचकर पैसे ट्रांसफर करने तक को तैयार कर दिया था।

पुलिस का समय पर पहुंचकर रेस्क्यू

जैसे ही इस पूरे मामले की सूचना साइबर क्राइम पुलिस को मिली तो उन्होंने तुरंत लोकेशन ट्रैक की और मौके पर पहुंचकर बुजुर्ग को वीडियो कॉल पर चल रही फर्जी सुनवाई दिखाते हुए समझाया कि यह सब धोखाधड़ी है। पुलिस ने ठग से LIVE कॉल पर बातचीत की और अंत में अमित देसाई को पूरी ठगी से बचा लिया।

इसके साथ ही सूरत साइबर क्राइम पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर ‘कोर्ट’, ‘सुनवाई’ या ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ नहीं करती। ऐसी किसी भी कॉल पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम शाखा से संपर्क करें।

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