Gujarat News: देशभर में साइबर ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं, लेकिन गुजरात के वडोदरा में जो मामला सामने आया है, उसने पुलिस तक को हैरान कर दिया है। यहां एक 67 वर्षीय बुजुर्ग को साइबर ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” कर 64 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर ली। ठगों ने उन्हें डराया कि उनके आधार कार्ड पर कई सिम कार्ड एक्टिव हैं, जिनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में किया जा रहा है। इसके बाद जांच के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर बार-बार बड़ी रकम RTGS के जरिए ट्रांसफर करवाते रहे।
आधार-सिम कार्ड का झांसा बन गया जाल
यह पूरा मामला वडोदरा के मकरपुरा इलाके का है। 23 मई को पीड़ित विवेक सोनार को एक कॉल आया। कॉलर ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार नंबर से कई सिम कार्ड एक्टिव हैं और उनका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। घबराए बुजुर्ग को कहा गया कि अगर वे “जांच” में सहयोग नहीं करेंगे, तो उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग का केस लग सकता है।
झांसे में फंसे 67 साल के बुजुर्ग
कॉल के बाद ठगों ने बुजुर्ग से WhatsApp वीडियो कॉल पर संपर्क बनाए रखा। खुद को “विषाल ठाकुर” नामक मुंबई साइबर ऑफिसर बताने वाले फर्जी अधिकारी ने उनसे आधार कार्ड, बैंक डिटेल्स, म्यूचुअल फंड, और फ्लैट की जानकारी मांगी। फिर WhatsApp पर CBI और RBI के फेक लेटरपैड भेजकर भरोसा दिलाया कि यह जांच असली है।
ठगों ने पीड़ित को चेतावनी दी कि कॉल डिस्कनेक्ट मत करो, किसी से बात मत करो और घर से बाहर मत निकलो। इस तरह उन्हें लगभग दो हफ्तों तक डिजिटल रूप से “कैद” रखा गया।
RTGS के नाम पर ठगी के चार किस्तें
26 मई को ठगों ने कहा कि जांच क्लीन करने के लिए ₹14,98,700 RTGS करने होंगे। 28 मई को फिर RBI के फर्जी लेटर पर ₹20,65,800 मांगे गए। 9 जून तक बुजुर्ग चार बार कुल ₹64,41,500 भेज चुके थे। हर बार ठग कहते “जैसे ही क्लीन चिट मिलेगी, सारा पैसा वापस कर देंगे।”
जब टूटी नींद और खुला फरेब
9 जून को जब बुजुर्ग ने रिफंड की स्थिति पूछी, तो ठगों ने फिर ₹14 लाख की नई मांग रख दी। तभी उन्हें शक हुआ कि कहीं वे किसी बड़े साइबर जाल में तो नहीं फंस गए हैं। इसके बाद उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर 15 अक्टूबर को वडोदरा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने अब इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं और IT एक्ट 66(D) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सावधान रहें!
साइबर पुलिस ने अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी या बैंक कभी वीडियो कॉल पर जांच नहीं करती। यदि किसी कॉल में आपसे कहा जाए कि आपका आधार किसी अपराध में जुड़ा है, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
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