Somanaath Svaabhimaan Parv: गुजरात के सौराष्ट्र तट पर अरब सागर की लहरों के बीच स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। अवसर था सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पावन धाम में पहुंचकर न केवल भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग का विधि-विधान से जलाभिषेक किया, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान को भी नमन किया। वैदिक मंत्रोच्चार, अनुष्ठानों की गूंज, भक्ति से सराबोर वातावरण और इतिहास को जीवंत करता भव्य ड्रोन शो यह यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, शौर्य और पुनर्जागरण की प्रतीक बन गई।
72 घंटे की साधना
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ में लगभग 72 घंटे तक चले विशेष अनुष्ठानों में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया और भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की। मंदिर प्रांगण में गूंजते मंत्र और समुद्र की निरंतर ध्वनि ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। शाम के समय आयोजित ड्रोन शो ने सोमनाथ के गौरवशाली इतिहास, उसके उत्थान-पतन और पुनर्निर्माण की गाथा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से आकाश पर उकेर दिया।
शौर्य यात्रा: परंपरा और नेतृत्व का अद्भुत दृश्य
गुजरात यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने लगभग दो किलोमीटर लंबी शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। इस यात्रा में पारंपरिक डमरू वादन, लोक वाद्य और शिवभक्ति के जयघोष गूंजते रहे। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री स्वयं भी डमरू वादन में शामिल हुए। सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ अपने नेता की एक झलक पाने को उमड़ी पड़ी थी। यह दृश्य केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और लोक परंपरा के सम्मान का प्रतीक बन गया।
जहां चंद्रदेव को मिला नया जीवन
सोमनाथ मंदिर को 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहां चंद्रदेव ने प्रजापति दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। शिव की कृपा से उन्हें पुनर्जीवन प्राप्त हुआ और तभी से यह धाम सोमनाथ कहलाया अर्थात चंद्रमा के स्वामी। इस स्थान को प्रभास तीर्थ भी कहा जाता है, जिसका उल्लेख अनेक पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
वास्तुकला जो समय से आगे
वर्तमान सोमनाथ मंदिर प्राचीन शिल्प और आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्वितीय संगम है। चालुक्य शैली में निर्मित इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है।
• मंदिर शिखर की ऊंचाई लगभग 150 फीट है, जिसके शीर्ष पर 10 टन वजनी विशाल कलश स्थापित है।
• मंदिर परिसर में 1,666 स्वर्ण-मंडित कलश इसकी दिव्यता को और बढ़ाते हैं।
• 27 फीट ऊंची ध्वजा समुद्र से ही दिखाई देती है, मानो दूर से ही श्रद्धालुओं का स्वागत कर रही हो।
• गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप तीन भागों में विभाजित मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को जीवंत कर देती है।
रहस्य और विशेषताएं जो इसे बनाती हैं अनोखा
सोमनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि अनेक रहस्यों और मान्यताओं का केंद्र है।
• अखंड ज्योति: मंदिर में निरंतर जलने वाली ज्योति भगवान शिव के शाश्वत स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है।
• बाण स्तम्भ: दक्षिण दिशा में स्थित इस स्तम्भ पर अंकित शिलालेख के अनुसार, इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक कोई भूभाग नहीं है।
• कपिल कुण्ड: कपिल मुनि से जुड़ा यह कुण्ड स्नान के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।
• समुद्र के समीप स्थित होने के कारण यहां की गूंज और वातावरण स्वयं में एक आध्यात्मिक अनुभव कराते हैं।
आस्था का महासंगम
आंकड़े बताते हैं कि हर वर्ष लगभग 92 से 97 लाख श्रद्धालु सोमनाथ महादेव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह संख्या केवल भक्तों की नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास की है जिसने सदियों के आक्रमणों और विध्वंस के बाद भी इस मंदिर को बार-बार पुनर्जीवित किया। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री की यह यात्रा उस संदेश को और मजबूत करती है कि सोमनाथ केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भारत की जीवंत आत्मा है, जो हर बार टूटकर भी और अधिक मजबूती से खड़ी होती है।
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