Yamuna Pollution Case : यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए किए जा रहे प्रयास लगातार नाकाम साबित हो रहे हैं। हाल ही में एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने नोएडा प्राधिकरण पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। आरोप है कि प्राधिकरण की लापरवाही के चलते सीवर का गंदा पानी कोंडली ड्रेन के जरिये सीधे यमुना नदी में डाला जा रहा है। यह जुर्माना पर्यावरणविद् अभिष्ट कुसुम गुप्ता की याचिका पर लगाया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि दिल्ली से नोएडा तक आने वाले नालों की फाइल तक नहीं की गई और गंदगी को रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए।
दो नए एसटीपी का किया निर्माण
इस जुर्माने के खिलाफ नोएडा प्राधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 13 अगस्त को सुनवाई कर सकता है। प्राधिकरण ने अपनी दलील में कहा है कि शहर में वर्तमान में 8 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता प्रतिदिन 411 मिलियन लीटर डेली (एमएलडी) है। इसके अलावा, 180 एमएलडी क्षमता के दो नए एसटीपी का निर्माण भी किया जा रहा है।
100 एमएलडी सीवेज का निस्तारण संभव
नोएडा प्राधिकरण ने कोर्ट में यह भी बताया कि 120 एमएलडी ट्रीटेड सीवेज पानी को शहर के विभिन्न सेक्टरों में ग्रीन एरिया की सिंचाई के लिए उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही, सेक्टर-62 में खोडा-मकनपुर के पास 16,000 वर्ग मीटर भूमि चिह्नित की गई है, जहां एक नया एसटीपी बनाया जाएगा, जिससे 100 एमएलडी सीवेज का निस्तारण संभव हो सकेगा।
प्रदूषण कम करने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए
प्राधिकरण ने स्वीकार किया कि कई सोसाइटी में एसटीपी कार्यरत नहीं हैं। इस पर कार्रवाई करते हुए, उन्होंने दोषी सोसाइटी पर जुर्माना लगाने की बात कही है। प्राधिकरण का दावा है कि प्रदूषण कम करने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं और यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए हर संभव प्रयास जारी हैं। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि एनजीटी का लगाया जुर्माना बरकरार रहेगा या प्राधिकरण को राहत मिलेगी।

