Big Blast In Delhi: देश की राजधानी दिल्ली वो शहर जो सत्ता का केंद्र है, लेकिन बीते दो दशकों में कई बार दहशत का मैदान बन चुका है। सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और जनवरी ये महीने दिल्ली के लिए जैसे किसी अशुभ याद की तरह लौटते रहे हैं। बम धमाकों की गूंज ने न सिर्फ जानें लीं, बल्कि शहर के दिल में एक स्थायी डर भी बसा दिया।
लाजपत नगर- 1997
1997 का लाजपत नगर ब्लास्ट ने दिल्ली को पहली बार झकझोर दिया। भीड़भाड़ वाले मार्केट में हुए इस धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 30 से ज्यादा लोग घायल हुए। यह हमला राजधानी की शांति को चीर गया और आतंक के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत बनी।
करोल बाग- 1998
1998 में करोल बाग के गैफिटी मार्केट में धमाका हुआ। त्योहारी सीजन में बाजार खचाखच भरा था। एक पल में खुशियां मातम में बदल गईं। 17 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
संसद भवन- 2001
2001 का संसद भवन हमला भारतीय लोकतंत्र पर सीधा वार था। गोलियों और विस्फोटों से गूंजती संसद की दीवारों ने उस दिन 9 लोगों की बलि ली। यह हमला भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल बन गया।
सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी- 2005
2005 का 29 अक्टूबर, त्योहारों के बीच मौत का दिन बन गया। सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में सीरियल ब्लास्ट हुए। 60 से अधिक लोगों की जान गई और 200 से ज्यादा घायल हुए। यह घटना दिल्ली के दिल को हिला गई थी।
कनॉट प्लेस, करोल बाग, इंडिया गेट और बाराखंबा रोड- 2008
2008 में फिर दहशत लौटी। 13 सितंबर को कनॉट प्लेस, करोल बाग, इंडिया गेट और बाराखंबा रोड जैसे व्यस्त इलाकों में एक साथ पांच धमाके हुए। 26 लोगों की मौत और सौ से अधिक घायल। इसके कुछ ही दिन बाद, 27 सितंबर को मेहरौली ब्लास्ट में दो मासूमों की जान चली गई।
दिल्ली हाई कोर्ट- 2011
2011 का दिल्ली हाई कोर्ट ब्लास्ट भी भयावह था। गेट नंबर 5 के पास हुए विस्फोट में 15 लोग मारे गए और 70 से अधिक घायल हुए।
इजरायली दूतावास- 2021
जनवरी 2021 में इजरायली दूतावास के पास धमाका हुआ। सौभाग्य से इस बार जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन चेतावनी साफ थी, आतंकी साए अब भी मंडरा रहे हैं।
लाल किला मेट्रो स्टेशन- 10 नवंबर 2025
और अब, 10 नवंबर 2025 लाल किला मेट्रो स्टेशन पर धमाका। 9 लोगों की मौत, कई घायल। यह हमला जैसे पुराने घावों को ताजा कर गया। दिल्ली फिर दहली है, और सवाल वही- क्या राजधानी कभी वाकई सुरक्षित हो पाएगी?
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