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उमर-शरजील को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, पांच अन्य आरोपियों को मिली जमानत

Umar-Sharjeel Bail Rejected: दिल्ली दंगों से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद और JNU के पूर्व छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इस फैसले के साथ ही दोनों को लगातार पांच साल से जारी न्यायिक हिरासत से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। हालांकि, कोर्ट ने इसी मामले में अन्य पांच आरोपियों को जमानत देने का आदेश दिया है।

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने 10 दिसंबर को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा लगातार हिरासत की जरूरत बताई गई है, क्योंकि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

UAPA के तहत गंभीर आरोप

दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस का तर्क रहा है कि यह सिर्फ हिंसा का मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कृत्यों से जुड़ा है जो सार्वजनिक सेवाओं को बाधित करते हैं और देश की अर्थव्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। कोर्ट ने भी जमानत पर विचार करते हुए इन पहलुओं पर चिंता जाहिर की।

2020 से जेल में बंद

उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि शरजील इमाम जनवरी 2020 से जेल में बंद हैं। दोनों की ओर से दलील दी गई कि जांच एजेंसी जानबूझकर गिरफ्तारी और चार्जशीट की प्रक्रिया को लंबा खींच रही है, जिससे ट्रायल में देरी हो रही है। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।

CAA विरोध से जुड़ी साजिश का आरोप

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बाद भड़के थे। कई दिनों तक चली हिंसा में कई लोगों की जान गई और बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद इसे सुनियोजित साजिश बताया और कई छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस का आरोप है कि उमर खालिद और शरजील इमाम के भाषणों और गतिविधियों ने कथित तौर पर हिंसा को भड़काने में भूमिका निभाई। शरजील इमाम से जुड़े कुछ वीडियो क्लिप्स को अभियोजन ने अहम सबूत बताया है, जिनमें कथित तौर पर ‘चक्का जाम’ और रणनीतिक रास्तों को बाधित करने की बात कही गई थी। दोनों आरोपियों ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है।

आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद साफ है कि उमर खालिद और शरजील इमाम को अभी लंबा कानूनी संघर्ष करना होगा। वहीं, अन्य पांच आरोपियों को मिली जमानत ने इस मामले को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है।

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