Delhi Grap-3: राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में एक बार फिर सांस लेना मुश्किल हो गया है। ठंड की दस्तक के साथ हवा में जहरीले कणों की मात्रा इतनी बढ़ गई है कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने गंभीर श्रेणी की सीमा लांघ दी है। सोमवार रात और मंगलवार सुबह तक दिल्ली-NCR के अधिकतर हिस्सों में AQI 400 के पार दर्ज किया गया। बवाना, नरेला, आनंद विहार, पंजाबी बाग, विवेक विहार और आईटीओ जैसे इलाकों में तो स्थिति और भयावह हो गई है, जहां सूचकांक 440 से 465 तक पहुंच गया।
हवा सांस लेने योग्य नहीं
ऐसे हालात में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण (Stage-3) तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है। यह चरण तब लागू होता है जब औसत AQI 400 से अधिक यानी “सीवियर कैटेगरी” में पहुंच जाता है। इस दौरान प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि हवा सांस लेने योग्य नहीं रहती और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने लगता है।
GRAP-3 के तहत सख्त पाबंदियां
- निर्माण और ध्वस्तीकरण पर रोक: सभी गैर-जरूरी निर्माण, ध्वस्तीकरण और खुदाई जैसे कामों को तत्काल रोकने का आदेश जारी।
- डीजल वाहनों पर नकेल: पुराने डीजल वाहनों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।
- निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रक बंद: सीमेंट, रेत, बजरी आदि ले जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
- डीजल जेनरेटरों का उपयोग वर्जित: आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर निजी और औद्योगिक इकाइयों में DG सेट्स का प्रयोग प्रतिबंधित।
- खनन और स्टोन क्रशर गतिविधियों पर रोक: धूल उड़ाने वाले सभी खनन कार्य बंद रहेंगे।
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल्ली की हवा में PM2.5 और PM10 कणों का स्तर सुरक्षित सीमा से चार से पांच गुना अधिक है। यह न केवल सांस की तकलीफ और अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ा सकता है, बल्कि बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
दिल्ली के प्रदूषण का भयावह नक्शा
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और CPCB के आंकड़ों के अनुसार, बवाना (465), मुंडका (464), वजीरपुर (462), पंजाबी बाग (460), नेहरू नगर (456) और ITO (452) में प्रदूषण स्तर खतरनाक सीमा से ऊपर है। वहीं, लोधी रोड (293) और द्वारका के NSIT क्षेत्र (240) जैसे कुछ इलाके ही अपेक्षाकृत “सुधरे” हुए हैं, पर वे भी “मध्यम से खराब” श्रेणी में हैं।
राजधानी एक बार फिर गैस चेंबर में तब्दील हो चुकी है, और अब सवाल यही है, क्या GRAP-3 की सख्तियां दिल्ली की दमघोंटू हवा को राहत दे पाएंगी या ये सिर्फ एक औपचारिक कदम बनकर रह जाएंगी?
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