Delhi-NCR AQI: दिल्ली-NCR की हवा एक बार फिर ज़हर उगल रही है। सर्दी के शुरुआती दिनों में ही प्रदूषण अपने चरम पर पहुँच गया है। रविवार सुबह राजधानी का औसत AQI 479 दर्ज किया गया, यानी हवा ‘गंभीर’ श्रेणी की आखिरी सीमा पर पहुँच चुकी है। कई इलाकों में दृश्यता इतनी कम है कि सुबह की धुंध सड़क और आसमान के बीच एक धुँधली दीवार बन गई है। सवाल बड़ा है, आखिर कब तक यह ज़हरीली चादर दिल्ली पर तनी रहेगी?
AQI हुआ 450 पार
रोहिणी, विवेक विहार, बवाना और आनंद विहार जैसे कई इलाकों में AQI 450 से ऊपर रिकॉर्ड हुआ। सुबह 9 बजे तक CPCB के 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 20 स्टेशन ‘गंभीर’ श्रेणी में चल रहे थे। पीएम2.5 का स्तर 315 माइक्रोग्राम और पीएम10 का स्तर 421 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज हुआ। जबकि WHO का सुरक्षित स्तर पीएम2.5 के लिए सिर्फ 15 माइक्रोग्राम है। साफ है दिल्ली की हवा WHO मानक से करीब 20 गुना जहरीली हो चुकी है।
NCR के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक-
- नोएडा: AQI 396
- गाजियाबाद: AQI 432
- गुरुग्राम: AQI 291
- फरीदाबाद: AQI 239
इनमें से अधिकांश क्षेत्रों में हवा ‘बहुत खराब’ से सीधे ‘गंभीर’ स्थिति में पहुँच चुकी है। इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों ने सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की है। उनका आरोप है कि “पानी छिड़काव से ‘शो’ बनता है… समाधान नहीं।”
स्मॉग छंट क्यों नहीं रहा? जाने वैज्ञानिक वजह-
- तापमान इनवर्शन
सर्दियों में जमीन की हवा ठंडी और ऊपर की गर्म रहती है। यह परत प्रदूषकों को नीचे ही फँसा लेती है। वे ऊपर नहीं उठ पाते और स्मॉग की मोटी परत बन जाती है। - अत्यंत धीमी हवा
इस समय हवा की रफ्तार 3–8 किमी/घंटा है। यानी प्रदूषक फैल नहीं पा रहे, लगातार जमा हो रहे हैं। - ट्रैफिक और औद्योगिक धुआँ
दिल्ली में रोज लगभग 10 लाख वाहन चल रहे हैं। पेट्रोल-डीजल से निकलने वाली NOx और CO गैसें धूप में रिएक्ट होकर ओजोन बनाती हैं, जिससे स्मॉग और घना होता है। कंस्ट्रक्शन भी एक बड़ा कारण है, 38% PM2.5 और 56% PM10 इसी से पैदा होता है। - पराली, कूड़ा और लैंडफिल
पराली का धुआँ, लैंडफिल साइटों में लगती आग और घरों में बायोफ्यूल का इस्तेमाल प्रदूषण को कई गुना बढ़ाता है।
राहत कब?
मौसम विभाग का कहना है कि 27–28 नवंबर से पहले सुधार की संभावना बेहद कम है। न हवा चल रही है, न बारिश की उम्मीद है, इसलिए अगले कुछ दिन दिल्ली-NCR की साँसें और भारी कर सकते हैं।
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