Monsoon Session: अब दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर सरकार सख्ती करने जा रही है। मानसून सत्र में दिल्ली सरकार एक नया बिल पेश करने वाली है जिससे स्कूल बिना सरकार की इजाजत फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। इसका सीधा फायदा होगा उन माता-पिता को, जो हर साल बढ़ती स्कूल फीस से परेशान रहते हैं।
क्या है बिल का मकसद?
हर साल कई प्राइवेट स्कूल बिना किसी नियम के फीस बढ़ा देते हैं। इससे मध्यमवर्गीय और आम परिवारों पर बोझ बढ़ जाता है। सरकार का कहना है कि शिक्षा एक सेवा है, न कि कमाई का साधन। इसलिए फीस को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। ऑर्डिनेंस से शुरू हुई थी तैयारी। सरकार ने इस बिल की तैयारी पहले ही शुरू कर दी थी। 29 अप्रैल 2025 को दिल्ली कैबिनेट ने Delhi School Education (Transparency in Fixation and Regulation of Fees) Ordinance 2025 को मंजूरी दी थी। इस ऑर्डिनेंस को अब संसद में विधेयक (बिल) के तौर पर लाया जाएगा ताकि इसे कानूनी रूप से लागू किया जा सके।
नियम तोड़ने पर सख्त सजा
अगर कोई स्कूल बिना मंजूरी फीस बढ़ाता है तो उसे 1 लाख से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ेगा। और अगर कोई स्कूल बार-बार ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि स्कूल का मैनेजमेंट भी बदला जा सकता है।
फीस बढ़ाने से पहले लेनी होगी मंजूरी
अब स्कूलों को अगर फीस बढ़ानी है, तो सबसे पहले उन्हें शिक्षा निदेशालय से मंजूरी लेनी होगी। स्कूलों को यह भी दिखाना होगा कि उन्हें किन कारणों से फीस बढ़ानी पड़ रही है। बिना ठोस कारण और सरकारी इजाजत के फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
माता-पिता को राहत मिलेगी
यह फैसला माता-पिता के लिए बहुत राहत देने वाला है। आजकल हर मां-बाप अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए काफी मेहनत करते हैं। लेकिन जब स्कूल अचानक फीस बढ़ा देते हैं, तो ये परिवार के बजट पर सीधा असर डालता है। अब यह सब बिना सरकार की निगरानी के नहीं होगा।
सरकार का सख्त संदेश
सरकार ने साफ कहा है कि शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं होने दिया जाएगा। इस कानून का मकसद शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत और पारदर्शी बनाना है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और माता-पिता को आर्थिक बोझ से राहत मिले।
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