Delhi News : दिल्ली सरकार द्वारा संचालित मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (IHBAS) में 26 सप्ताह के शिशु की मौत हो गई। घटना की वजह बुनियादी चिकित्सा संसाधनों की कमी और देखभाल में देरी के कारण बताई गई। इस मामले की जांच में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (nhrc) भी पूरी तरह लग गई है।
NHRC ने दो हफ्ते के भीतर मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी इस मामले की जांच कर रही है। आयोग के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है कि मृतक शिशु की माँ का इलाज अभी अस्पताल में चल रहा है।
आयोग ने रिपोर्ट की जाँच की है और कहा है कि अगर यह सच है, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया और दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है। दो हफ्ते के भीतर इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
क्या है पूरा मामला ?
मृतक शिशु की मां, 21 वर्षीय पूजा, एक बेसहारा मरीज थीं जिन्हें अदालत के आदेश के तहत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पूजा को 4 सितंबर को जीटीबी अस्पताल से IHBAS में लाया गया था। उस समय वह 26 सप्ताह की गर्भवती थीं।
शौचालय में दिया जन्म
डॉ. प्रीति के अनुसार, पूजा को रविवार शाम करीब 5 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई। और उसने शौचालय में ही बच्चे को जन्म दे दिया। आरोप है कि इहबास में महिला और उसके नवजात शिशु को इलाज नहीं दिया गया। गर्भनाल काटने के लिए क्लैंप तक नहीं था।
एम्बुलेंस और अस्पताल में मौत
जन्म के तुरंत बाद शिशु और पूजा को पास के स्वामी दयानंद अस्पताल ले जाया गया। समय से पहले जन्म और अविकसित फेफड़ों के कारण शिशु की रात 9:12 बजे मौत हो गई।
अस्पताल की व्यवस्थाओं में चूक सामने आई
इस घटना से IHBAS में गंभीर व्यवस्थागत कमियाँ सामने आई हैं। अस्पताल के कर्मचारियों ने खुद माना कि प्रसव के लिए जरूरी सुविधाएँ मौजूद नहीं थीं, जबकि वहां गर्भवती मरीज भर्ती थी। इसके अलावा, मरीज के परिवार का कोई संपर्क विवरण भी उपलब्ध नहीं था।
मानवाधिकार और महिला आयोगों की प्रतिक्रिया
पूजा अभी जीटीबी अस्पताल में भर्ती हैं। महिला कार्यकर्ता संगीता गुलाटी ने कहा कि यह घटना मरीज के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और मानसिक रूप से बीमार लोगों की सुरक्षा और देखभाल पर सवाल खड़े करती है।
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
IHBAS के निदेशक राजिंदर के. धमीजा ने कहा कि इस मामले में किसी तरह की लापरवाही के आरोप सही नहीं हैं। मातृ एवं शिशु वार्ड की प्रमुख डॉ. प्रतिभा गहलावत ने अभी इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की।
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