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दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन: फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर NIA की नजर, फर्जी मान्यता और सीक्रेट कोड की डायरी से बढ़ा शक

Delhi Blast: दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके की जांच अब शिक्षा जगत तक जा पहुंची है। फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के रडार पर है। जांच के दौरान विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर कई संदिग्ध सुराग मिले हैं, जिनसे एजेंसियों को शक है कि कहीं न कहीं इस संस्थान का संबंध दिल्ली ब्लास्ट मॉड्यूल से जुड़ा हो सकता है।

क्या है पूरा मामला

सूत्रों के मुताबिक, NIA और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम ने हाल ही में अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में छापा मारा। छापेमारी के दौरान कमरा नंबर 4 और कमरा नंबर 13 से दो डायरियां बरामद की गईं। इन डायरियों में कुछ रहस्यमय कोड और विदेशी भाषा में नोट्स लिखे मिले हैं, जिन्हें अब डिकोड किया जा रहा है। जांच एजेंसियां मान रही हैं कि इन कोड्स का लिंक दिल्ली ब्लास्ट की योजना से जुड़ा हो सकता है।

इसी बीच, विश्वविद्यालय एक और विवाद में घिर गया है। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को झूठे दावे करने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। NAAC ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय ने कभी मान्यता के लिए आवेदन नहीं दिया और न ही उसे किसी चक्र में ‘A ग्रेड’ मान्यता मिली है।

NAAC का जारी हुआ नोटिस

लेकिन यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर दावा किया गया था कि उसके तीन कॉलेज, अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (1997 से A ग्रेड), ब्राउन हिल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (2008 से), और अल-फलाह स्कूल ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (2006 से A ग्रेड) NAAC से मान्यता प्राप्त हैं। NAAC ने इसे पूरी तरह भ्रामक और जनता को गुमराह करने वाला बताया है।

इस बीच, जांच एजेंसियों ने बताया कि संदिग्ध आतंकी नेटवर्क चार बड़े शहरों में धमाके करने की योजना बना रहा था। हर मॉड्यूल को एक-एक शहर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दिल्ली ब्लास्ट उसी नेटवर्क की पहली कड़ी माना जा रहा है।

फर्जी मान्यता, संदिग्ध दस्तावेज़

अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब NIA, NAAC और राज्य पुलिस तीनों जांच एजेंसियों के घेरे में है। फर्जी मान्यता, संदिग्ध दस्तावेज़ और ब्लास्ट कनेक्शन, ये तीनों पहलू इस केस को और भी पेचीदा बना रहे हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षा संस्थान है, या किसी बड़े साजिशी नेटवर्क की ढाल।

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