Delhi AQI: दिवाली की रोशनी के बीच दिल्ली-एनसीआर की हवा जहरीली होती जा रही है। त्योहारी रात में प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने तुरंत प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण (Stage-II) को लागू करने का आदेश जारी किया है।
CAQM की आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘बहुत खराब’ श्रेणी को पार कर गया। आयोग ने बताया कि GRAP-2 के तहत 12 सूत्रीय एक्शन प्लान लागू किया गया है, जिसमें सड़कों की सफाई, धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों की जांच, ट्रैफिक प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा और डीजल जेनरेटर (DG Set) पर नियंत्रण जैसे सख्त कदम शामिल हैं।
दिल्ली में हवा ‘बेहद खराब’
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की हवा दिवाली के दिन ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुंच गई। कई इलाकों में AQI 400 के पार चला गया, जो ‘गंभीर’ स्तर का संकेत देता है। सबसे ज्यादा प्रदूषण दिल्ली के आनंद विहार क्षेत्र में दर्ज किया गया, जहां AQI 417 पहुंच गया। यह दिल्ली-एनसीआर का सबसे प्रदूषित इलाका बन गया। इसके अलावा-
नई दिल्ली: AQI 367
विजयनगर (गाज़ियाबाद): AQI 348
नोएडा सेक्टर-1: AQI 344
नोएडा: AQI 341
गुरुग्राम: AQI 283
रविवार शाम तक दिल्ली का औसत AQI 300 के करीब था, लेकिन रात बढ़ने के साथ आतिशबाज़ी और वाहनों के धुएं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।
लागू हुए सख्त प्रतिबंध
CAQM ने एनसीआर के सभी राज्यों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को GRAP-II की सख्त पालना के निर्देश दिए हैं। अब निर्माण स्थलों की निरंतर निगरानी, कूड़ा जलाने पर सख्त कार्रवाई, और खुले में धूल उड़ाने वाली गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाई गई है। इसके अलावा निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित किया गया है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे अनावश्यक वाहन न चलाएं और पटाखों से बचें।
त्योहार की रौनक के बीच चिंता बढ़ी
दिवाली की रात जहां लोगों ने घरों को दीपों से सजाया, वहीं हवा में फैले धुएं और जहरीले कणों ने सांस लेना मुश्किल कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हवा की दिशा और गति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता और भी खतरनाक स्तर पर जा सकती है। अब सभी की निगाहें मौसम और प्रशासनिक कदमों पर टिकी हैं, क्या यह प्रदूषण पर लगाम लगाने में मदद करेंगे या फिर दिल्ली फिर से ‘गैस चेंबर’ में तब्दील हो जाएगी?
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