Delhi Encounter: दिल्ली के रोहिणी इलाके में बीती रात पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ ने पूरे बिहार पुलिस तंत्र को हिला दिया। इस एनकाउंटर में कुख्यात गैंगस्टर रंजन पाठक समेत उसके तीन साथी ढेर हो गए। दिल्ली और बिहार पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया। बिहार के डीजीपी ने खुलासा किया है कि रंजन पाठक का गैंग आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में दहशत फैलाने की तैयारी में था।
चुनाव से पहले बड़ी साजिश का पर्दाफाश
DGP बिहार ने बताया कि रंजन पाठक और उसकी ‘सिग्मा एंड कंपनी गैंग’ लंबे समय से बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर और मुजफ्फरपुर जिलों में सक्रिय थी। यह गैंग कॉन्ट्रैक्ट किलिंग में माहिर थी और पिछले छह वर्षों में कई हत्याओं को अंजाम दे चुकी थी। हाल ही में इस गिरोह ने ब्रह्मर्षि समाज के जिला अध्यक्ष गणेश शर्मा की हत्या कर इलाके में तनाव फैला दिया था। इसके बाद पुलिस ने इसकी तलाश तेज कर दी थी। यह गैंग हर वारदात के बाद दिल्ली या NCR के इलाकों में छिप जाता था। खुफिया इनपुट मिला कि रंजन और उसके साथी फिलहाल दिल्ली में मौजूद हैं और चुनाव से पहले किसी बड़े नेता या कारोबारी पर हमला करने की योजना बना रहे हैं। इसी सूचना पर बिहार पुलिस ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर संयुक्त ऑपरेशन चलाया।
एनकाउंटर की पूरी कहानी
22 और 23 अक्टूबर की दरमियानी रात लगभग 2:20 बजे, पुलिस टीम ने रोहिणी सेक्टर-24 इलाके में छापा मारा। जैसे ही पुलिस ने घेराबंदी की, बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं। करीब 25 मिनट चली इस मुठभेड़ में चारों बदमाश गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल डॉ. बीएसए अस्पताल, रोहिणी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एनकाउंटर के दौरान चार पुलिसकर्मियों की बुलेटप्रूफ जैकेट पर गोलियां लगीं, जिनमें दिल्ली क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर अरविंद, SI मनीष और सी नवीन शामिल हैं। हालांकि सभी जवान सुरक्षित हैं।
बिहार पुलिस की बड़ी राहत
रंजन पाठक बिहार पुलिस के लिए वर्षों से सिरदर्द बना हुआ था। उसके खिलाफ कई राज्यों में 20 से ज्यादा आपराधिक केस दर्ज थे, जिनमें हत्या, फिरौती, और लूट जैसे संगीन अपराध शामिल हैं। DGP ने कहा कि इस ऑपरेशन के बाद बिहार चुनाव में दहशत फैलाने की साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया गया है। अब बिहार पुलिस जांच कर रही है कि गैंग के बाकी सदस्यों के तार किन राजनैतिक या आपराधिक नेटवर्क से जुड़े थे। रोहिणी एनकाउंटर ने एक बार फिर दिखा दिया है जो कानून को चुनौती देगा, वो अब बच नहीं पाएगा।
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