CG Naxal: आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर मंगलवार सुबह वह मुठभेड़ हुई जिसने देश की सबसे खतरनाक नक्सली शख्सियतों में शामिल मादवी हिडमा का अंत कर दिया। सुरक्षाबलों की इस खास कार्रवाई में हिडमा के साथ उसकी पत्नी जो खुद भी सक्रिय नक्सली कमांडर थी ढेर हो गई। dense जंगलों में चला यह एनकाउंटर सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी और माओवादी संगठन के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है।
कैसे दी मात
माओवादियों पर लंबे समय से निगरानी रख रही आंध्र प्रदेश पुलिस और विशेष बलों को बीते दिनों सीमा के पास संदिग्ध गतिविधियों के इनपुट मिले थे। इसके बाद अल्लूरी जिले और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले की सीमा पर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इसी दौरान घात लगाए बैठे नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग खोल दी। जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई की। करीब आधे घंटे चली गोलियों की इस मुठभेड़ में PLGA की बटालियन नंबर 1 का प्रमुख और CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का कुख्यात सदस्य मादवी हिडमा मारा गया।
पिछले दो दशकों से सबसे बड़ी चुनौती
43 वर्षीय हिडमा पिछले दो दशकों से सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। छत्तीसगढ़ की दरभा घाटी में 2013 के नरसंहार से लेकर 2017 के सुकमा हमले तक जिसमें CRPF के 25 जवान शहीद हुए थे हर बड़े हमले में उसका दिमाग और उसकी नेतृत्व भूमिका सामने आई। जंगल में गुरिल्ला रणनीति, तेज़ मूवमेंट और अचानक वार करने की क्षमता ने उसे नक्सलियों का सबसे ख़तरनाक चेहरा बना दिया था। उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था।
हिडमा की पत्नी भी संगठन में अहम पद संभालती थी और कई बड़ी कार्रवाईयों में सीधे तौर पर शामिल रही थी। मुठभेड़ में दोनों का मारा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है।
नक्सल नेटवर्क पर बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि हिडमा की मौत के बाद दक्षिण बस्तर में माओवादियों की पकड़ कमजोर होगी। संगठन की योजना बनाने, संसाधन जुटाने और नए कैडर को तैयार करने की जिम्मेदारी अब किसी और पर जाएगी, जिससे नक्सल नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ सकता है। सुरक्षा बलों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि जंगलों में सक्रिय आखिरी नक्सली मॉड्यूल को भी खत्म किया जा सके।

