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बिहार कांग्रेस में बगावत का बिगुल! आनंद माधव के नेतृत्व में कल सदाकत आश्रम में धरना-उपवास, पार्टी को बचाने की मुहिम तेज

by | Oct 22, 2025 | बिहार

Bihar Election: बिहार कांग्रेस में अंदरूनी उथल-पुथल अब खुलकर सामने आ चुकी है। राज्य में पार्टी की दुर्दशा से नाराज वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने अब मोर्चा खोल दिया है। रविवार को पटना के होटल सम्राट में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें आनंद माधव जो हाल ही में अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष को भेज चुके हैं के नेतृत्व में कई दिग्गज नेता शामिल हुए। बैठक का मकसद था बिहार में कांग्रेस को बचाने की लड़ाई को नई दिशा देना।

बैठक में उपस्थित नेताओं ने कांग्रेस आलाकमान से कई अहम मांगें रखीं। पहली मांग में कहा गया कि बिहार कांग्रेस की “नीलामी” करने वाले प्रभारी और सह-प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से वापस बुलाया जाए, क्योंकि उन्हीं की गलत नीतियों के कारण पार्टी की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। साथ ही, इन नेताओं के खिलाफ जांच समिति गठित करने की भी मांग की गई।

अनुभवी नेताओं को सौंपे जिम्मेदारी

दूसरी प्रमुख मांग यह रही कि राजनीतिक रूप से अनुभवी नेताओं को बिहार कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपी जाए, जो आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी को मजबूत आधार प्रदान कर सकें। तीसरी मांग में कहा गया कि वर्तमान अध्यक्ष और विधानमंडल दल के नेता खुद चुनाव लड़ रहे हैं और संगठन की उपेक्षा कर रहे हैं, इसलिए तत्काल एक कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति जरूरी है, जो रोज़मर्रा के कामकाज और चुनावी रणनीति को देख सके।

उपवास सह धरना प्रदर्शन

बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि 23 अक्टूबर 2025 को सभी कांग्रेसजन पटना के सदाकत आश्रम में उपवास सह धरना प्रदर्शन करेंगे, ताकि उनकी आवाज़ दिल्ली तक पहुंच सके। आनंद माधव ने कहा, “हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि कांग्रेस को गिरवी रखने वालों से है। बिहार कांग्रेस बचेगी, तभी राष्ट्रीय कांग्रेस बचेगी। अगर हम बिहार जीतेंगे, तो देश जीतेंगे। अभी भी समय है क्षति प्रबंधन का, वरना देर हो जाएगी।” बैठक में कई वरिष्ठ और पूर्व विधायकों की मौजूदगी ने इस आंदोलन को और भी मजबूती दी।

इनमें छत्रपति यादव, गजानंद शाही, डॉ. अजय कुमार सिंह, सुधीर चौधरी, मधुरेंद्र सिंह, राजकुमार राजन, कैसर खान, नागेंद्र पासवान विकल, कंचना सिंह, रेखा पटेल सहित कई वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता शामिल रहे। कुल मिलाकर, बिहार कांग्रेस में यह बैठक एक नए जनांदोलन की दस्तक मानी जा रही है- कांग्रेस को बचाने और गिरवी राजनीति से मुक्त कराने की शुरुआत।

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