Rabri Devi Bungalow: बिहार की सत्ता में नए समीकरण बनते ही राज्य की सियासत एक बार फिर उबाल पर है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनी नई NDA सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 20 वर्षों से आवंटित 10 सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला खाली करने का आदेश जारी कर दिया है। यह वही बंगला है जो दो दशकों तक लालू परिवार का राजनीतिक केंद्र, रणनीति का अड्डा और सत्ता का स्थायी पता रहा है। अचानक आए इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या यह प्रशासनिक कार्रवाई है, या बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत?
महागठबंधन और RJD खेमे को चौंकाया
सरकार गठन के तुरंत बाद जिस तेज़ी से यह आदेश जारी हुआ, उसने महागठबंधन और RJD खेमे को चौंका दिया। राबड़ी देवी को अब लेजिस्लेटिव काउंसिल में विपक्ष की नेता के तौर पर नया आवास आवंटित किया गया है और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन विभाग ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इसका मतलब है कि 10 सर्कुलर रोड अब लालू परिवार को हर हाल में खाली करना होगा। तेजप्रताप और रोहिणी आचार्या ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे नीतीश-लालू संबंधों के “अंत” से जोड़ दिया।
घर से भावनात्मक रिश्ता था जुड़ा
तेजप्रताप यादव ने लिखा “छोटे भाई ने मुख्यमंत्री की कुर्सी ली और बड़े भाई के घर को खाली कराने का फरमान जारी कर दिया।” उन्होंने दावा किया कि 28 वर्षों से लाखों राजद कार्यकर्ताओं का जिस घर से भावनात्मक रिश्ता जुड़ा था, अब वह एक नोटिस में खत्म कर दिया गया। उनकी यह टिप्पणी साफ संकेत देती है कि राजद इस फैसले को सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के तौर पर देख रहा है।
इस बार बदली परिस्थितियां
ध्यान देने वाली बात यह है कि नीतीश कुमार इससे पहले भी कई बार BJP और महागठबंधन के बीच पाला बदलते रहे हैं, लेकिन कभी राबड़ी देवी के आवास को लेकर ऐसा कदम नहीं उठाया गया था। इस बार परिस्थितियां बदल चुकी हैं, ताजा विधानसभा चुनाव में BJP मज़बूत होकर उभरी है, और इसी शक्ति-संतुलन का असर सरकार के शुरुआती फैसलों में साफ झलक रहा है।
रिश्तों के टूटते धागे और सत्ता के नए समीकरण
यह घटनाक्रम तेजस्वी यादव के पुराने केस की याद भी दिलाता है, जब 2017 में उन्होंने डिप्टी CM पद गंवाने के बाद 5 देशरत्न मार्ग का बंगला खाली करने का आदेश को चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। उस समय कोर्ट ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवास और सुविधाएं वापस लेने का निर्देश दिया था। अब 10 सर्कुलर रोड का खाली होना केवल एक बंगले की कहानी नहीं है, यह बिहार की राजनीति के बदलते चेहरे, रिश्तों के टूटते धागे और सत्ता के नए समीकरणों का प्रतीक बन चुका है। अगले कुछ दिनों में इस फैसले के राजनीतिक असर और भी गहराते दिखाई दे सकते हैं।

