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रेलवे में नौकरी के बदले जमीन! लालू परिवार पर कोर्ट का शिकंजा, क्या पूरा परिवार जाएगा जेल?

Land For Jobs Scam: दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को बहुचर्चित “लैंड फॉर जॉब” मामले में बड़ा फैसला सुनाया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ अरोप तय कर दिए गए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यादव परिवार ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले में एक क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह साजिश रची, जिससे उनका लाभ हुआ।

कई धाराओं में लगे आरोप

कोर्ट ने कुल 98 आरोपियों में से 52 को अरोपमुक्त किया, जबकि शेष 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ेगा। पांच आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है। अदालत ने आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) व 13(2) के तहत मुकदमा चलाने का निर्देश दिया। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि लालू प्रसाद यादव ने रेल मंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग किया और रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले अपने परिवार के नाम अचल संपत्तियां हासिल कीं। कोर्ट ने इसे “विनिमय तंत्र” करार दिया, जिसमें कई लोगों को नौकरी दी गई और बदले में जमीन ली गई।

बिहार की राजनीति में भूचाल

मुकदमे की अगली सुनवाई 29 जनवरी को तय की गई है। इस फैसले के बाद अब सवाल यह है कि क्या पूरा लालू परिवार जेल की राह पर जाएगा, या राजनीतिक दबाव और कानूनी लड़ाई से बच पाएगा। इस मामले ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है और विपक्ष की सियासी लड़ाई को और तीव्र कर दिया है। इससे पहले जांच एजेंसियों ने लंबे समय तक इस मामले की पड़ताल की थी, जो उस अवधि से जुड़ा है जब लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे देश की नजरें लालू परिवार और उनके राजनीतिक भविष्य पर टिक गई हैं।

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