होम = State = बिहार = कांटे की टक्कर में ‘छोटे दल’ बन सकते हैं किंगमेकर, हर वोट का होगा महत्व

कांटे की टक्कर में ‘छोटे दल’ बन सकते हैं किंगमेकर, हर वोट का होगा महत्व

Bihar Election 2025 : बिहार की सियासत में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होता दिख रहा है। दो प्रमुख गठबंधनों NDA और महागठबंधन के बीच मुख्य जंग जारी है, लेकिन मैदान में कई छोटे दलों की मौजूदगी समीकरणों को पलट सकती है। राज्य की राजनीतिक फिजा ऐसी है कि कुछ हजार वोट भी किसी सीट का नतीजा तय करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं।

“छोटे खिलाड़ी” भी बड़ा असर डाल सकते हैं

पिछले विधानसभा चुनाव ने यह साफ कर दिया था कि बिहार की राजनीति में “छोटे खिलाड़ी” भी बड़ा असर डाल सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 2020 में NDA से अलग होकर चुनाव लड़ा था। भले ही पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली, लेकिन उसके प्रत्याशियों ने जदयू उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया। नतीजतन, जदयू की सीटें घटकर 43 रह गई जबकि पिछली बार उसके पास 71 सीटें थीं।

इस बार भी स्थिति कुछ वैसी ही बनती दिख रही है। हर वोट की अहमियत इतनी है कि कोई भी गठबंधन अपने किसी पुराने सहयोगी को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहता। आखिर, कुछ हजार वोटों की कमी सत्ता से दूर कर सकती है।

पिछली बार का नजदीकी मुकाबला

2020 के विधानसभा चुनाव में 52 सीटें ऐसी थी जहां जीत-हार का अंतर पांच हजार वोटों से भी कम था। इनमें से 28 सीटों पर राजद या जदयू उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। राजद ने सबसे अधिक 15 सीटें और जदयू ने 13 सीटें इन करीबी मुकाबलों में जीतीं। कांग्रेस और भाजपा को नौ-नौ सीटें मिलीं, जबकि वीआईपी, हम, लोजपा, भाकपा, भाकपा-माले और निर्दलीय प्रत्याशियों ने एक-एक सीट जीती।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि सात सीटों पर तो जीत का अंतर 500 वोट से भी कम था। जैसे हिलसा सीट पर जदयू ने महज 12 वोटों से जीत दर्ज की। बरबीघा में 113, रामगढ़ में 189, मटिहानी में 333, भोरे में 462, डेहरी में 464 और बछवाड़ा में 484 वोटों से परिणाम बदले।

52 सीटों पर पांच हजार से कम वोट का अंतर

सिकटा, सुगौली, त्रिवेणीगंज, रानीगंज, अमनौर, बड़हिया, महाराजगंज, समस्तीपुर, आरा, बक्सर, औरंगाबाद, बोधगया, झाझा, चकाई सहित 52 सीटों पर जीत-हार का अंतर पांच हजार से भी कम था। जो इस बात का संकेत है कि बिहार में हर वोट की गिनती राजनीति की दिशा तय कर सकती है।

पिछले विधानसभा चुनाव में छोटे दलों का वोट शेयर

  • लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा)- 5.8%
  • भाकपा (माले)- 3.2%
  • रालोसपा- 1.8%
  • वीआईपी- 1.5%
  • हम (हितेश्वरी विकास पार्टी)- 1%
  • भाकपा व माकपा- 1.5%

यह आंकड़े दिखाते हैं कि भले ही छोटे दलों की सीटें सीमित रही हों, लेकिन उनका वोट शेयर किसी भी गठबंधन के समीकरण को बिगाड़ने के लिए काफी है।

ये भी पढ़ेBihar Election 2025 : सीट बंटवारे पर चिराग पासवान का संकेत – बोले, “बातचीत जारी है, मंत्री होने के नाते मंत्रालय की जिम्मेदारी भी निभानी है”

बिहार के 2025 (Bihar Election 2025) विधानसभा चुनाव में परिस्थितियां कुछ वैसी ही बन रही हैं जैसी 2020 में थीं। छोटे दलों की भूमिका एक बार फिर से निर्णायक साबित हो सकती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि इस बार सत्ता की कुंजी “छोटे” दलों के पास होगी और हर वोट बिहार की सियासत का रुख तय करेगा।

बंगाल