बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपनी चुनावी तैयारी को रफ्तार दे दी है। पार्टी प्रमुख तेजस्वी यादव ने 44 विधानसभा सीटों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर लिए हैं। इस कदम के साथ RJD ने यह साफ कर दिया है कि वह इस बार चुनाव में वे जल्द मैदान में उतरना चाहती है ।साथ ही उम्मीदवारों के चयन में कोई देरी नहीं भी नहीं करना चाहते ।
पुराने चेहरों की जगह नए नामों को मौका
तेजस्वी यादव इस बार टिकट वितरण में बड़ा बदलाव करने के मूड में हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कई पुराने विधायकों की जगह नए और सक्रिय नेताओं को मौका देने की तैयारी चल रही है। तेजस्वी का मानना है कि जनता तक पहुंचने और बूथ स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए अब नए चेहरों की जरूरत है। इसीलिए उन्होंने कुछ पुराने चेहरों की जगह जमीनी स्तर पर लोकप्रिय उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी है।
हर क्षेत्र में संतुलन पर जोर
44 संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार करते समय पार्टी ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का खास ध्यान रखा है। तेजस्वी यादव ने हर जिले से नेताओं की राय ली है और पार्टी के अंदर हुए सर्वे के आधार पर इन नामों को तय किया है। माना जा रहा है कि सूची में युवाओं, महिलाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को तरजीह दी गई है।
पार्टी में टिकट को लेकर हलचल
सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार हो रही है, पार्टी में उत्साह और बेचैनी दोनों बढ़ी है। कुछ नेताओं को टिकट कटने का डर सता रहा है तो कुछ नए नामों को लेकर जोश भी दिख रहा है। तेजस्वी खुद हर उम्मीदवार की रिपोर्ट देख रहे हैं और जल्द ही अंतिम सूची पर मुहर लगाई जाएगी।
राजनीतिक समीकरणों पर असर तय
RJD के इस फैसले से बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी दल खासकर एनडीए अब अपनी रणनीति पर फिर से विचार कर रहे हैं, क्योंकि जिन सीटों पर RJD ने मजबूत उम्मीदवार उतारे हैं । वहां मुकाबला और भी कड़ा हो सकता है। पार्टी का यह कदम यह भी दिखाता है कि तेजस्वी यादव अब चुनाव को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि मैदान पर संगठन की ताकत दिखाना चाहते हैं।
आधिकारिक सूची जल्द
तेजस्वी यादव की मंजूरी के बाद जल्द ही इन 44 सीटों के उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा की जाएगी। इसके बाद राजद अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत करेगा। बिहार में पहले चरण के नामांकन शुरू हो चुके हैं, इसलिए पार्टी की यह तैयारी सही समय पर मानी जा रही है।राजनीति के जानकार मानते हैं कि यह कदम RJD के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
अब देखना होगा कि जनता इन नए चेहरों को कितना स्वीकार करती है और क्या तेजस्वी की यह रणनीति बिहार की सत्ता तक पहुंचने में मददगार बनती है या नहीं ।

