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कौन हैं रकीबुल हुसैन जिन्हें निशाना बना कर असम के पूर्व कांग्रेस चीफ भूपेन बोरा ने दिया इस्तीफा

Assam Congress controversy: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले असम प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़ने की एक बड़ी वजह पार्टी सांसद रकीबुल हुसैन को बताया है। भूपेन बोरा ने आरोप लगाए कि रकीबुल के हाथों में असम कांग्रेस की कमान है। गौरव गोगोई केवल चेहरा भर हैं। जानना जरूरी है कि रकीबुल हुसैन कौन हैं और वो भूपेन बोरा के निशाने पर क्यों हैं?

कौन हैं रकीबुल हुसैन?

रकीबुल धुबरी से सांसद हैं और पूर्व में तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रह चुके हैं। असम में उनकी पहचान कांग्रेस के सबसे कद्दावर मुस्लिम नेता की है। बीते लोकसभा चुनाव में रकीबुल हुसैन ने धुबरी सीट पर एआईयूडीएफ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को दस लाख से ज़्यादा वोटों से हराया। रकीबुल की जीत का अंतर सम्भवतः पूरे देश में सबसे ज़्यादा था। इससे पहले धुबरी से बदरुद्दीन अजमल लगातार तीन बार से जीत रहे थे।

सांसद बनने से पहले रकीबुल हुसैन नौगाँव जिले की समागुड़ी विधानसभा सीट से 2001 से 2024 तक यानी तेइस साल तक विधायक रहे। सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने उनके बेटे तंजील हुसैन को टिकट दिया लेकिन वो अपने पिता की पाँच जीत के सिलसिले को क़ायम नहीं रख पाए। बहरहाल अजमल को बड़े अंतर से हराने की से रकीबुल का क़द काफ़ी बड़ा हो गया। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति का वो अहम हिस्सा हैं। लेकिन पार्टी में उनके बढ़ते दख़ल से असहज होकर भूपेन बोरा ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया।

लोकसभा चुनाव में भूपेन बोरा की बड़ी भूमिका

रोचक बात यह है बीते लोकसभा चुनाव के दौरान असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने ही रकीबुल को धुबरी से अजमल के सामने लड़ने के लिए मनाया था। लेकिन बाद में सियासी समीकरण ऐसे बदले की रकीबुल भूपेन के निशाने पर आ गए! भूपेन बोरा के आरोपों पर रकीबुल हुसैन ने फिलहाल कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन उन्होंने कहा कि वो दो दिन बाद इस बारे में बात करेंगे।

दरअसल रकीबुल हुसैन पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के करीबी थे। इसी वजह से असम प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष गौरव गोगोई उनपर काफ़ी भरोसा करते हैं। असम में मुस्लिम आबादी क़रीब तीस फीसदी है। ऐसे में कांग्रेस को एआईयूडीएफ जैसी क्षेत्रीय पार्टी को फिर से उभरने से रोकने के लिए रकीबुल जैसे नेता की स्वाभाविक ज़रूरत है। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन था। इस बार असम में सरकार बनाने के करीब आने के लिए कांग्रेस को अल्पसंख्यक प्रभाव वाली सीटों पर क्लीनस्वीप करना होगा। लेकिन असम की सियासत के जानकार बताते हैं कि उपरी असम में रकीबुल हुसैन की छवि अच्छी नहीं है। बीजेपी उन पर प्रदेश सरकार में वन मंत्री रहते घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाती है। उनके नाम पर वोटों के ध्रुवीकरण होने का खतरा रहता है।

कांग्रेस ने आरोपों को किया खारिज

हालांकि कांग्रेस सूत्र इन बातों को खारिज करते हुए कहते हैं कि बोरा के असल निशाने पर रकीबुल नहीं गौरव गोगोई ही हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि असम प्रदेश कांग्रेस की कमान गौरव गोगोई के हाथों में है। वो लोकसभा में पार्टी के उपनेता हैं। उनके पास पर्याप्त सियासी अनुभव है। रकीबुल उनके सहयोगी की भूमिका में हैं। लेकिन बोरा कांग्रेस को नुक़सान पहुंचाने के लिए रकीबुल हुसैन के बहाने सांप्रदायिक कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि बीजेपी में उनकी जगह मजबूत हो सके।

बहरहाल कांग्रेस अब बोरा से मिले झटके से उबरने की कोशिश में जुट गई है। कांग्रेस आने वाले दिनों में यह संदेह देने की कोशिश करेगी कि भूपेन बोरा सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के इशारे पर काम कर रहे थे। पार्टी सूत्र बताते हैं कि भूपेन के घर जा कर उन्हें मनाने की नाकाम कोशिश कर जितेंद्र सिंह और गौरव गोगोई ने यह कोशिश की कि बोरा के लिए “सहानुभूति फैक्टर” को कम कर सकें। प्रियंका गांधी के आगामी गुवाहाटी दौरे पर उनके स्वागत के लिए कांग्रेस एक बड़े शक्ति प्रदर्शन की तैयारी भी कर रही है।

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