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‘पापा के लिए बनाऊंगा रन’, पिता को मुखाग्नि, आंखों में आंसू और फिर मैदान की ओर कदम, रिंकू सिंह जुड़ने टीम से

Rinku Singh Returns To Duty: भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते सितारे रिंकू सिंह ने निजी दुख को पीछे छोड़कर कर्तव्य को चुना। पिता को मुखाग्नि देने के कुछ ही घंटों बाद वह टीम से जुड़ने को कोलकाता रवाना हो गए। भावुक रिंकू ने कहा “अब हर रन पापा के नाम होगा।” शुक्रवार सुबह रिंकू के पिता खानचंद का 60 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से लीवर कैंसर के स्टेज-4 से जूझ रहे थे और ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वेंटिलेटर पर रहते हुए भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और सुबह करीब 4:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

राष्ट्रीय कर्तव्य को प्राथमिकता

शनिवार सुबह अलीगढ़ के ओजोन सिटी स्थित आवास पर अंतिम संस्कार के बाद रिंकू ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने मां बीना देवी और छोटी बहन नेहा सिंह को ढांढस बंधाया, वहीं बड़े भाई सोनू सिंह को घर की जिम्मेदारी सौंपते हुए मां का विशेष ध्यान रखने को कहा। पारिवारिक दायित्व निभाने के बाद रिंकू सुबह 11:30 बजे अलीगढ़ से रवाना हुए और कोलकाता पहुंचकर भारतीय टीम के साथ दोबारा जुड़ गए। कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय कर्तव्य को प्राथमिकता देने के उनके फैसले की क्रिकेट जगत में जमकर सराहना हो रही है।

परिवार को दी हिम्मत

इधर, ओजोन सिटी में शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। राजनीति और सामाजिक जगत से जुड़े कई प्रमुख लोग रिंकू के आवास पहुंचे और परिवार को हिम्मत दी। जानकारी के मुताबिक, खानचंद को मंगलवार को नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा रही थी और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। रिंकू के भाई सोनू लगातार अस्पताल में मौजूद रहे, जबकि तबीयत बिगड़ने पर रिंकू भी उनसे मिलने पहुंचे थे।

आर्थिक तंगी के बावजूद चमका सितारा

रिंकू के संघर्ष की कहानी भी भावुक कर देने वाली है। शुरुआती दौर में पिता उनके क्रिकेट खेलने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन एक मैच में इनाम के तौर पर मिली बाइक ने सोच बदल दी। आर्थिक तंगी के बावजूद खानचंद ने बेटे के सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसी प्यार और सम्मान के प्रतीक के तौर पर रिंकू ने बीते वर्ष पिता को 3.19 लाख रुपये की कावासाकी निंजा बाइक भेंट की थी।

आज पिता भले ही साथ नहीं हैं, लेकिन रिंकू के हर शॉट, हर रन और हर जीत में उनकी मेहनत और आशीर्वाद हमेशा जिंदा रहेगा।

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