होम = अध्यात्म = छठ पूजा पर क्यों लगाती हैं महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर ? जानिए इसके धार्मिक कारण

छठ पूजा पर क्यों लगाती हैं महिलाएं नाक से मांग तक सिंदूर ? जानिए इसके धार्मिक कारण

Chhath Puja 2025 : छठ पूजा के अवसर पर व्रती महिलाओं की पारंपरिक सजावट में सिंदूर का बहुत खास स्थान होता है। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई हिस्सों में छठ के दौरान महिलाएं नाक से मांग तक लंबा सिंदूर लगाती हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ी है, बल्कि इसके पीछे पौराणिक कथाएं और वैज्ञानिक कारण भी हैं।

सिंदूर: वैवाहिक जीवन का प्रतीक

हिंदू धर्म में सिंदूर विवाहित महिलाओं के वैवाहिक जीवन और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जितना लंबा सिंदूर लगाया जाता है, उतनी ही लंबी पति की आयु होती है। यह न केवल वैवाहिक सुख-समृद्धि का प्रतीक है बल्कि पति की सुरक्षा, दीर्घायु और पारिवारिक सौहार्द का भी संकेत देता है।

लाल और नारंगी सिंदूर का अंतर

आम तौर पर महिलाएं लाल सिंदूर का प्रयोग करती हैं, जो प्रेम, समर्पण और वैवाहिक निष्ठा का प्रतीक है। लेकिन छठ पूजा के दौरान नारंगी सिंदूर लगाने की परंपरा है। नारंगी रंग सूर्य देव का प्रतीक माना जाता है, जो छठ पर्व के आराध्य हैं। यह रंग ऊर्जा, पवित्रता और सकारात्मकता का द्योतक है। धार्मिक मान्यता है कि छठ व्रत रखने वाली महिलाएं नारंगी सिंदूर लगाकर सूर्य उपासना के प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट करती हैं।

नाक से मांग तक सिंदूर लगाने की पौराणिक कथा

 इस परंपरा की उत्पत्ति एक पुरानी लोककथा से भी जुड़ी मानी जाती है। कहा जाता है कि जंगल में रहने वाले वीरवान नामक शिकारी और उसकी पत्नी धीरमति की प्रेम और वीरता की कहानी इसका आधार है। कथा के अनुसार, जब वीरवान पर दुश्मन कालू ने हमला किया, तो धीरमति ने साहस दिखाकर कालू का वध किया। घायल वीरवान ने प्रेम से धीरमति के सिर पर हाथ रखा और उसके खून से माथा लाल हो गया। तभी से सिंदूर को प्रेम, समर्पण और वीरता का प्रतीक माना जाने लगा।

छठ पूजा में नाक से मांग तक सिंदूर लगाने का अर्थ है — पति की लंबी आयु और परिवार की सुरक्षा के लिए की जाने वाली प्रार्थना।

महाभारत काल से जुड़ी मान्यता

महाभारत काल की एक कथा के अनुसार, जब दु:शासन द्रौपदी को कौरव सभा में घसीटकर ले जा रहा था, तब द्रौपदी बिना सिंदूर लगाए थीं। अपनी लाज बचाने के लिए उन्होंने जल्दबाजी में सिंदूर दानी अपने सिर पर उलट दी, जिससे सिंदूर नाक तक फैल गया।

बंगाल